मुंबई अब नहीं रहेगा प्यासा, 4,007 करोड़ में समुद्र का पानी बनेगा जीवनधारा
मुंबई पानी की कमी से निपटने के लिए एक बड़ा नया प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है। साल 2029 तक, शहर को भारत के सबसे बड़े डीसैलिनेशन प्लांट में से एक से रोजाना 400 मिलियन लीटर ताजा पानी मिलेगा। 4,007 करोड़ रुपये की यह कोशिश कई सालों से खराब मानसून के कारण पानी की किल्लत झेलने के बाद की जा रही है। इसका मकसद यह है कि मुंबई फिर कभी प्यासा न रहे।
मुंबई प्लांट: पहले चरण में मिलेगा 200 MLD पानी
यह प्लांट 12 एकड़ जमीन पर बनेगा। इसमें IDE टेक्नोलॉजीज का इस्तेमाल होगा और यही कंपनी अगले 2 दशकों तक इसे चलाएगी। इस प्लांट का निर्माण हैदराबाद की GVPR इंजीनियर्स कर रही है।
पहले चरण में इसकी क्षमता 200 MLD पानी पैदा करने की होगी। अगर सब ठीक रहा, तो दूसरे चरण में यह क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
मुंबई को अपने जलाशयों से ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है, खासकर जब मानसून देर से आता है। ऐसे में, यह प्लांट पानी की कमी को पूरा करने में बहुत मदद कर सकता है और लाखों लोगों के लिए पानी की सप्लाई बनाए रख सकता है। पर्यावरण सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं। इसका मतलब है कि सिर्फ पानी की मात्रा पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है।