
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में मुस्लिम पक्ष को झटका, हिंदू पक्ष की याचिका पर होगी सुनवाई
क्या है खबर?
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों से जुड़ी याचिका खारिज कर दी है और हिंदू पक्ष की सिविल वाद की पोषणीयता वाली याचिकाएं स्वीकार कर ली हैं। यानी हिंदू पक्ष की याचिकाओं को कोर्ट ने सुनवाई योग्य माना है।
बता दें कि इस मामले पर 6 जून को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
फैसला
18 याचिकाओं पर आया फैसला
मामले में हिंदू पक्ष ने 18 याचिकाएं दायर की थीं और शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को हिंदुओं की बताया था और वहां पूजा का अधिकार दिए जाने की मांग की थी।
वहीं, मुस्लिम पक्ष ने वक्फ कानून, उपासना स्थल अधिनियम और दूसरे कानूनों का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष की याचिकाओं को खारिज करने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा कि मालिकाना हक को लेकर हिंदू पक्ष की याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं।
हिंदू पक्ष की दलीलें
हिंदू पक्ष ने क्या दलीलें दीं?
हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ईदगाह का पूरा ढाई एकड़ क्षेत्र श्रीकृष्ण विराजमान का गर्भगृह है और शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के पास भूमि का कोई रेकॉर्ड नहीं है।
हिंदू पक्ष ने कहा कि श्रीकृष्ण मंदिर तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण किया गया है और बिना स्वामित्व अधिकार के वक्फ बोर्ड ने अवैध प्रक्रिया के इस भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया है।
हिंदू पक्ष ने दावा कि जमीन का मालिकाना हक कटरा केशव देव का है।
मुस्लिम पक्ष की दलीलें
मुस्लिम पक्ष ने दी ये दलीलें
मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि इस जमीन पर दोनों पक्षों के बीच 1968 में समझौता हुआ है और 60 साल बाद समझौते को गलत बताना ठीक नहीं है, इसलिए याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं।
मुस्लिम पक्ष ने उपासना स्थल कानून का हवाला देते हुए कहा कि 15 अगस्त, 1947 के दिन जिस धार्मिक स्थल की पहचान और प्रकृति जैसी है वैसी ही बनी रहेगी और मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है।
विवाद
क्या है कृष्ण जन्मभूमि विवाद?
कृष्ण जन्मभूमि विवाद 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक से जुड़ा है।
12 अक्टूबर, 1968 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट के साथ समझौता किया। समझौते में 13.7 एकड़ जमीन पर मंदिर-मस्जिद दोनों बनने की बात हुई। इसके तहत श्रीकृष्ण जन्मस्थान के पास 10.9 एकड़ जमीन का मालिकाना हक है, जबकि 2.5 एकड़ जमीन का मालिकाना हक शाही ईदगाह के पास है।
अब हिंदू पक्ष ने मस्जिद की 2.5 एकड़ जमीन पर भी दावा किया है।