मणिपुर में फिर हिंसा: उग्रवादियों की गोलाबारी में 2 महिलाओं समेत 4 की मौत
क्या है खबर?
मणिपुर में हिंसा पूरी तरह थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्य के तामेंगलोंग और नोनी जिलों में रविवार (13 सितंबर) को 2 अलग-अलग संदिग्ध उग्रवादी हमलों में 2 महिला समेत कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, एक 6 साल के बच्चे को गोली लगी है। पुलिस के अनुसार, तामेंगलोंग में घटना सुबह करीब 4 बजे हुई, जिसमें 2 लोगों की मौत हुई। 12 घंटे बाद नोनी में भी 2 लोग मारे गए।
घटना
तामेंगलोंग में पति-पत्नी की हत्या
पुलिस ने बताया कि पहली घटना सुबह करीब 5:30 बजे तामेंगलोंग जिले के कैमाई थाना क्षेत्र के टोलन गांव में हुई। इस घटना में 46 वर्षीय लिंगजंगाई सिंगसिट की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति सेनेह सिंगसिट ने अस्पताल ले जाते हुए दम तोड़ दिया।
उनके 6 साल के बेटे को भी गोली लगी, जिसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। फिलहाल उसका सिलचर मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
दूसरी घटना
लोंगपी थाने से 30 किलोमीटर दूर हुई दूसरी घटना
दूसरी घटना नोंगबा थाने के अंतर्गत आने वाले लॉंन्गपी गांव में हुई। यहां दोपहर करीब 3 बजे हथियारबंद उग्रवादियों ने एक महिला और एक पुरुष की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतकों की पहचान जूली गंगटे और आर गंगटे के रूप में हुई है।
नोगंबा पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, "लोंगपी गांव थाने से लगभग 30 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। सड़क की खराब हालत के कारण कोई भी पुलिसकर्मी घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाया है।"
मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने की हमलों की निंदा
मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने इन घटनाओं पर दुख जताते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा कायरतापूर्ण कृत्य है।
उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, "निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा पूरी तरह से कायरता है। ऐसी घिनौनी हरकत बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है और हमारे समाज में इनका कोई स्थान नहीं है।"
कैमाई विलेज अथॉरिटी सहित कई संगठनों, विधायकों और नेताओं ने भी इन हमलों की निंदा की है।
ब्लैक डे
कुकी समुदाय के ब्लैक डे के दिन हुई घटना
यह घटनाएं ऐसे दिन हुई, जब मणिपुर में कुकी समुदाय हर साल 13 सितंबर को 'साहनीत नी' यानि ब्लैक डे मनाता है। यह 1990 के दशक में हुए कुकी-नागा संघर्ष में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है।
वहीं, मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा में अब तक 306 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 49 लोग लापता हैं।