राम मंदिर विवाद: 1,500 कर्मचारियों के करोड़ों के वेतन को लेकर नहीं थे कोई नियम
राम मंदिर में दान चोरी की घटना ने ट्रस्ट के मैनेजमेंट की कई कमियों को उजागर कर दिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास अपने 1500 कर्मचारियों के लिए न तो कोई तय नियम थे और न ही वेतन का कोई निश्चित ढांचा। दिलचस्प बात यह है कि पुजारियों की नियुक्ति के लिए उनके पास एक पूरी नियमावली थी, लेकिन आम कर्मचारियों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं था।
एक कर्मचारी ने बताया कि किसी तय नियम के बिना ही करोड़ों रुपये कर्मचारियों के वेतन पर खर्च कर दिए गए, लेकिन मैनेजमेंट से जुड़ी ये ज़रूरी बातें ट्रस्टियों की बैठकों में कभी उठाई ही नहीं गईं।
ट्रस्ट ने कभी कर्मचारियों की नीतियों पर चर्चा नहीं की
आय और संपत्ति से जुड़ी रिपोर्ट तो नियमित रूप से आती रहती थीं, लेकिन ट्रस्ट ने कर्मचारियों के मैनेजमेंट से जुड़ी बुनियादी नीतियों पर कभी ध्यान नहीं दिया। इस स्थिति से ट्रस्ट के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की सही से जांच की गई थी या नहीं।
किसी को नहीं पता कि मंदिर परिसर में काम करने वाले स्टाफ का पुलिस सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) हुआ था या नहीं। इस पूरे विवाद से यह भी सामने आया कि राम शंकर यादव 'टिन्नू' नाम का एक आरोपी, जो कभी सिर्फ एक वॉलंटियर के तौर पर काम करता था, बिना ट्रस्टियों की जानकारी में आए एक प्रभावशाली मैनेजर कैसे बन गया। यह सब साफ दिखाता है कि ट्रस्ट में गवर्नेंस से जुड़े मामलों को कितना नजरअंदाज किया गया।