महाराष्ट्र का सागौन दांव: किसानों की चांदी या पर्यावरण को खतरा?
महाराष्ट्र सरकार ने सागौन के पेड़ को अब सुरक्षित पेड़ों की सूची से हटा दिया है। 9 जून को इस फैसले का ऐलान हुआ, जिसके बाद अब किसान अपनी जमीन पर उगाए गए सागौन को आसानी से काट और बेच पाएंगे। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का मकसद किसानों को फायदा पहुंचाना और लकड़ी के कारोबार को सरल बनाना है।
पर्यावरण प्रेमियों को जंगल और वन्यजीवों को नुकसान होने का डर
हिंदुस्तान के फर्नीचर उद्योग में सागौन की लकड़ी बहुत पसंद की जाती है, लेकिन पहले के सख्त नियमों के चलते किसान इसे अपनी जमीन पर लगाने से बचते थे। अब सरकार उम्मीद कर रही है कि इससे ज्यादा किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए सागौन के पेड़ लगाएंगे। हालांकि, हर कोई इस फैसले से खुश नहीं है। पर्यावरण प्रेमियों को डर है कि अगर इस पर सही तरीके से ध्यान नहीं दिया गया, तो जंगल और वन्यजीवों को भारी नुकसान हो सकता है। हालांकि, सागौन की लकड़ी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए अभी भी परमिट लेना जरूरी होगा। यानी, यह पूरी तरह से खुली छूट नहीं है।