पुणे पोर्शे मामला: सुप्रीम कोर्ट से रक्त के नमूनों से छेड़छाड़ के 3 आरोपियों को जमानत
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के चर्चित पुणे पोर्शे कार हादसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नाबालिग आरोपी के रक्त के नमूनों से छेड़छाड़ करने वाले 3 आरोपियों को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने आदित्य सूद, आशीष मित्तल और संतोष गायकवाड़ को 18 महीन से जेल में होने के कारण जमानत दे दी। बार एंड बेंच के मुताबिक, पीठ ने शर्तों के साथ जमानत दी है और उल्लंघन पर जमानत रद्द होने की चेतावनी दी।
आरोपी
तीनों आरोपियों में कौन-कौन शामिल?
मामले में आरोपी मित्तल मुख्य आरोपी के पिता का दोस्त है, जबकि सूद उस लड़के का पिता है जो कार की पिछली सीट पर बैठा था। गायकवाड़ एक बिचौलिए का काम करता है जिसने रक्त परीक्षण में हेराफेरी करने के लिए आरोपी के परिजनों से 3 लाख रुपये घूस लिए थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में जमानत याचिका खारिज कर दी थी और आरोपियों के आर्थिक संपन्न होने के कारण गवाहों को प्रभावित करने का खतरा जताया था।
सुनवाई
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कार की पिछली सीट पर बैठे नाबालिग के खिलाफ कोई आरोप नहीं है। आरोप लगने के बाद से वे 18 महीने से जेल में हैं। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार चालक के खिलाफ सजा 3 साल की है, नाबालिग पर किशोर न्याय बोर्ड में मुकदमा चल रहा है। इसलिए उनकी निरंतर कैद से बहुत नुकसान होगा। कोर्ट ने तीनों को निचली अदालत की शर्तों पर जमानत देने को कहा है।
घटना
क्या है पुणे पोर्श कार मामला?
19 मई, 2024 को पुणे के कल्याणी नगर में रात ढाई बजे पोर्शे कार से नाबालिग ने बाइक सवार इंजीनियर महिला-पुरुष को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। मामले में नाबालिग आरोपी को कोर्ट ने सिर्फ निबंध लिखने की सजा दी, जिसका विरोध हुआ। इसके बाद आरोपी की जमानत रद्द हुई। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहत दी। मामले में किशोर के पिता, डॉक्टर अजय टावरे, श्रीहरि हलनोर, अस्पताल कर्मचारी अतुल घाटकांबले और दो बिचौलिए जेल में थे।