पश्चिम एशिया युद्ध का असर: LPG महंगी होते ही JNPT से 40 प्रतिशत ड्राइवर गायब, 40,000 कंटेनर फंसे
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से LPG की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर भारत के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) के कामकाज पर पड़ा है, जहां हालात बुरी तरह बिगड़ गए हैं। रसोई गैस के महंगा होते ही बाहर से आने वाले कई ट्रेलर ड्राइवरों के लिए भोजन का इंतजाम करना मुश्किल हो गया। सड़क किनारे लगे खाने के ठेले या तो बंद हो गए या उन्होंने अपने दाम काफी बढ़ा दिए। इसका नतीजा यह हुआ कि पोर्ट पर ड्राइवरों की भारी कमी हो गई। अप्रैल के मध्य में जहां करीब 17,000 कंटेनर अटके थे, वहीं मई के दूसरे सप्ताह तक यह संख्या बढ़कर 40,000 हो गई।
करीब 40 प्रतिशत ड्राइवर गायब
एक समय तो ऐसा भी आया जब आधे से ज्यादा ड्राइवर नदारद थे। इसकी वजह से ट्रक (ट्रेलर) बेकार खड़े रह गए और बंदरगाह पर माल का ढेर लग गया। सरकार ने रेल सेवा शुरू करने और शुल्क में छूट देने जैसे कई कदम उठाए, लेकिन ड्राइवरों की कमी फिर भी बनी रही। यह कमी अभी भी लगभग 40 प्रतिशत बनी हुई है। प्याज निर्यातकों के खेप भेजने में देरी हुई, और उनका कुछ माल तो पोर्ट पर ही सड़ गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। आयातित फलों की खेप भी देरी से भेजी गई। हालांकि, जरूरत के कारण कुछ ड्राइवर वापस लौटे हैं, लेकिन खाने-पीने की बढ़ती कीमतें और भोजन पकाने की ठीक व्यवस्था न होना अभी भी कई लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।