लैंसेट का खुलासा: 70 प्रतिशत कुत्तों का टीकाकरण 3 साल में केरलम से मिटा देगा रेबीज
द लैंसेट रीजनल हेल्थ - साउथईस्ट एशिया में छपे एक नए अध्ययन से पता चला है कि अगर कुत्तों का पूरी तरह टीकाकरण किया जाए, कुत्ते के काटने के बाद बेहतर इलाज मिले और PEP (पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस) के इलाज में जो कमी है उसे दूर किया जाए, तो रेबीज से होने वाली मौतों को 83 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
अगर केरलम में पालतू और आवारा दोनों तरह के 70 प्रतिशत कुत्तों का टीकाकरण कर दिया जाए, तो 3 साल के अंदर इंसानों में रेबीज से होने वाली मौतें शून्य हो सकती हैं। इसके मुकाबले, बच्चों को रेबीज के रूटीन टीके देने से 10 सालों में सिर्फ 10 अतिरिक्त जानें ही बचाई जा सकेंगी, लेकिन इसमें लाखों-करोड़ों रुपये ज्यादा खर्च होंगे।
शोधकर्ताओं की सलाह- कुत्ते के काटने के बाद 95 प्रतिशत लोगों को मिले इलाज
केरलम के शोधकर्ताओं का कहना है कि रेबीज के ज्यादातर मामले कुत्तों के काटने से होते हैं, इसलिए कुत्तों का टीकाकरण सबसे अहम है। शोधकर्ताओं ने यह भी सलाह दी है कि कुत्ते के काटने के बाद इलाज पाना आसान बनाया जाए।
अगर ऐसे लोगों का अनुपात जो डॉक्टरी मदद लेते हैं, 70 से बढ़कर 95 प्रतिशत हो जाए, तो 1,100 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें रोकी जा सकती हैं। टीम ने "वन हेल्थ" योजना का सुझाव दिया है, जिसमें स्थानीय प्रशासन और NGO मिलकर काम करें ताकि लंबे समय तक अच्छे नतीजे मिलें।