लद्दाख के नेताओं ने बातचीत के बेनतीजा रहने पर दी बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी
लद्दाख के बड़े नेताओं का कहना है कि अगर 9 सितंबर को सरकार के साथ उनकी बातचीत बेनतीजा रही, तो वे अपना विरोध प्रदर्शन और तेज कर देंगे। उनकी मांगों में अनुच्छेद 371 के तहत विशेष सुरक्षा शामिल है। साथ ही वे पिछले साल हुई हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय चाहते हैं, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेना और मुआवजा देना शामिल है। नेताओं ने यह भी मांग की है कि घटना की आधिकारिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
लद्दाख की मांगों पर धीमी रफ्तार
ये मुद्दे 2019 में लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही उठाए जा रहे हैं। LAB के चेयरमैन चेरिंग दोरजे लाकरुक ने इस धीमी रफ्तार पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि हिंसा से जुड़े कुल 80 मामलों में से अब तक सिर्फ 25 ही वापस लिए जा सके हैं। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने जानकारी दी कि अभी एक प्रस्तावित विरोध मार्च को टाल दिया गया है। लेकिन, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत नाकाम रही, तो "हम अपने आंदोलन को बहुत मजबूती से आगे बढ़ाएंगे।"