भारत के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र का डेटा लीक; क्या-क्या हुआ चोरी, कैसे लगी सेंध?
क्या है खबर?
तमिलनाडु में स्थित भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना (KKNPP) पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। एक रैंसमवेयर समूह ने कथित तौर पर इस परियोजना से जुड़ी हजारों फाइलों को डार्क वेब पर लीक कर दिया है। दावा है कि इनमें संयंत्र के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, आपूर्तिकर्ताओं के नाम, कंट्रोल रूम और अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं। ये फाइलें पिछले महीने लीक की गई थीं। आइए जानते हैं अब तक क्या-क्या पता है।
रिलायंस
रिलायंस समूह से जुड़े सर्वर चुराया गया डेटा
रिपोर्ट के मुताबिक, हैकरों के समूह 'वर्ल्ड लीक्स' ने डार्क वेब पर कुडनकुलम संयंत्र से जुड़ी 19,000 से ज्यादा संवेदनशील फाइलें साझा की हैं। ये दस्तावेज लगभग 8.58 लाख फाइलों के उस बड़े संग्रह का हिस्सा हैं, जिन्हें कथित तौर इस परियोजना से जुड़े रिलायंस समूह से चुराया गया था।
रिलायंस ने माना है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा का सर्वर हैक किया गया था और इसकी जानकारी सरकार को दे दी गई है।
डेटा
क्या-क्या हुआ लीक?
लीक हुए दस्तावेजों में कथित तौर पर 2016 से लेकर 2025 तक की अवधि से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं, जो करीब 14.3 गीगाबाइट (GB) के हैं।
इनमें कूलिंग और वेंटिलेशन प्रणालियों से संबंधित इंजीनियरिंग चित्र, एक नियंत्रण कक्ष की लेआउट योजना, भारतीय और रूसी इंजीनियरों से संबंधित बैठकों की जानकारी और संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट, विक्रेता विवरण, उपकरण प्रस्ताव, आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी, आंतरिक बीमा दस्तावेज जैसे कागजात शामिल हैं।
ये दस्तावेज संयंत्र की यूनिट 3 और 4 से संबंधित हैं।
तरीका
कैसे लगी डेटा में सेंध?
रिपोर्ट के अनुसार, लीक हुआ डेटा रिलायंस समूह के रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के सिस्टम से लिया गया था, जिसे 2018 में कुडनकुलम की यूनिट 3 और 4 के लिए प्रमुख बुनियादी ढांचे के निर्माण का अनुबंध दिया गया था।
सर्वर कंपनी योट्टा के अनुसार, उसके सिस्टम ने 29 मई को संदिग्ध रैंसमवेयर गतिविधि का पता लगाया था, जिसे तत्काल नियंत्रित कर लिया गया। हालांकि, इससे पहले ही बड़ी मात्रा में फाइलें चोरी कर ली गई थीं।
बयान
NPCIL ने कहा- सुरक्षा से जुड़ी कोई चिंता नहीं
न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) ने कहा कि परमाणु सुरक्षा प्रणालियों या रिएक्टर संचालन में कोई चूक नहीं हुई है।
NPCIL ने बताया, "ये डेटा केवल यूनिट 3 और 4 के लिए बैलेंस ऑफ प्लांट (BoP) कॉमन सर्विस फैसिलिटीज से संबंधित हैं। ये सुविधाएं पारंपरिक प्रकृति की हैं और आमतौर पर थर्मल पावर प्लांटों के साथ-साथ अन्य उद्योगों में पाई जाती हैं। इनका परमाणु सुरक्षा या सुरक्षा प्रणालियों से कोई संबंध नहीं है।"
पिछला हमला
संयंत्र पर 2019 में भी हुआ था साइबर हमला
यह पहला मौका नहीं है जब कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का नाम किसी साइबर सुरक्षा घटना से जुड़ा हो।
2019 में भी संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। जांचकर्ताओं ने बताया था कि यह सिस्टम की जानकारी और नेटवर्क डिटेल्स इकट्ठा करने में सक्षम था।
शुरू में NPCIL ने डेटा लीक की खबरों से इनकार किया था, लेकिन बाद में कहा था कि एक प्रशासनिक प्रणाली प्रभावित हुई थी।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा स्टेशन है, जो तमिलनाडु के कुडनकुलम में स्थित है। इसका निर्माण 2002 में रूस की सहायता से शुरू हुआ था और 2027 तक इसके पूर्ण क्षमता पर संचालित होने की उम्मीद है।
फिलहाल इससे पैदा हुई बिजली का 50 प्रतिशत हिस्सा तमिलनाडु को आवंटित किया जाता है। इसके अलावा कर्नाटक, केरल और पुदुचेरी को भी बिजली आपूर्ति की जाती है। करीब 15 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय पूल में जोड़ा जाएगा।