प्रधानमंत्री ने किया देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन, जानें खासियत
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजस्थान के पचपदरा में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन किया। इस रिफाइनरी का उद्घाटन पहले 21 अप्रैल को होना था, लेकिन ठीक एक दिन पहले आग लगने के चलते कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था। 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) क्षमता वाली इस ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल परिसर को 79,450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। आइए इसकी खासियत जानते हैं।
रिफाइनरी
सबसे पहले पचपदरा रिफाइनरी के बारे में जानिए
यह रिफाइनरी लगभग 4,400 एकड़ क्षेत्र में फैली है और इसका परिसर करीब 32 किलोमीटर की दूरी तक फैला है। जनवरी, 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने ही इसका शिलान्यास किया था। इसमें कुल 13 प्रसंस्करण इकाई हैं, जिनमें 9 रिफाइनरी और 4 पेट्रोकेमिकल इकाई हैं। ये सालाना 9 मिलियन टन कच्चे तेल की रिफाइनिंग करने में सक्षम है। इसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार ने संयुक्त रूप से मिलकर बनाया है।
खासियत
क्या है रिफाइनरी की खासियत?
पचपदरा रिफाइनरी देश की सबसे उन्नत, हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी है। यानी ये कहीं से भी आने वाले भारी और निम्न गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को भी रिफाइन करने की क्षमता रखती है। रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम, भारी टैंक भारत में ही बने हैं। भारत की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परिसर एक साथ है। पर्यावरण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक का इस्तेमाल। पेट्रोल-डीजल के अलावा, पॉलिएथिलीन और बेंजीन जैसे कई उत्पाद भी बनेंगे।
आंकड़े
रिफाइनरी से जुड़े आंकड़े जानिए
इसकी पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता 2.4 MMTPA है। रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) 17.0 है और इसकी पेट्रोकेमिकल यील्ड 26 प्रतिशत से अधिक है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप है। इसे 27 API ग्रेड के कच्चे तेल को रिफाइन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके पेट्रोकेमिकल परिसर की क्षमता 2 MMPTA है। यह देश की 24वीं रिफाइनरी है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए परिसर में 3 समर्पित फायर स्टेशन बनाए गए हैं।
पाइपलाइन
तेल को जमने से रोकने के लिए खास हीटिंग पाइपलाइन
कच्चा तेल पाइपलाइन में जमने लगता है। इसे रोकने के लिए मुंद्रा बंदरगाह से पचपदरा तक विशेष हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई है। इसमें जगह-जगह हीटिंग स्टेशन और थर्मल इंसुलेशन लगाया गया है, ताकि तेल न जमे। दैनिक भास्कर के मुताबिक, लमस टेक्नोलॉजी, UOP, यूनिवेशन टेक्नोलॉजीज जैसी वैश्विक कंपनियों ने अपनी पेट्रोकेमिकल, क्रैकर यूनिट्स की तकनीक प्रदान की है। साथ ही लाखों टन स्ट्रक्चरल स्टील और विशेष स्टील से स्ट्रक्चर बनाए गए हैं।
तेल
कहां से आएगा और कहां जाएगा तेल?
इस रिफाइनरी को हर साल 9 MMTA कच्चे तेल की जरूरत होगी। इसमें से करीब 15 लाख टन राजस्थान के मंगला टर्मिनल से आएगा। बाकी 75 लाख टन कच्चा तेल गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से आयात किया जाएगा। इसके लिए मुंद्रा से पचपदरा तक पाइपलाइन बिछाई गई है। रिफाइनरी में बनने वाला पेट्रोल और डीजल HPCL की पाइपलाइन के जरिए गुजरात के पालनपुर तक भेजा जाएगा। वहां से इसे पूरे देश में वितरित किया जाएगा।
टाइमलाइन
रिफाइनरी का 2013 में भी हुआ था शिलान्यास
दरअसल, 2004 में बाड़मेर में मंगला ऑइल फील्ड की खोज हुई थी। यहां 2009 में उत्पादन शुरू हुआ। उसके बाद राजस्थान में एक स्थानीय रिफाइनरी की जरूरत महसूस हुई। 2012-13 में सर्वे शुरू हुआ। 2013 में UPA सरकार के दौरान सोनिया गांधी ने इस रिफाइनरी का शिलान्यास किया था। तब इसकी लागत 37,230 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि, इसके बाद राज्य में सरकार बदल गई और काम रुक गया। अशोक गहलोत के कार्यकाल में ज्यादातर काम हुआ।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
औद्योगिक क्षेत्र में ग्रीनफील्ड का मतलब पूरी तरह से नई औद्योगिक सुविधा होती है, जिसे अविकसित जमीन पर शुरू से बनाया जाता है। इनमें काम करने वाले लोगों के लिए रहने की जगह और अन्य सहायक सुविधाएं शामिल हैं। इसमें अक्सर आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है। वहीं, ग्रीनफील्ड के उलट एक ब्राउन फील्ड होता है, जिसमें पहले से मौजूद इकाई का विस्तार या उसमें बदलाव किया जाता है।