कर्नाटक: 52 आपराधिक मामले वापस, 'तुष्टीकरण' के आरोपों से गरमाई सियासत
कर्नाटक सरकार ने 52 आपराधिक मामले वापस लेने का फैसला किया है, जिनमें से कई मामले 2022 के अलामपुर दंगों से जुड़े थे। गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि यह फैसला कन्नड़ समर्थक और किसान संगठनों की लंबे समय से की जा रही मांगों का जवाब है। लेकिन इस कदम से विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि जिन मामलों को वापस लिया गया है, उनमें दंगा और पुलिस पर हमले जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
विपक्ष ने मामलों को वापस लेने को तुष्टीकरण बताया
जिन लोगों के मामले वापस लिए गए हैं, उनमें कार्यकर्ता, किसान और दलित समूह के लोग शामिल हैं। अकेले कन्नड़ कार्यकर्ता वटल नागराज के 10 मामले वापस लिए जाने थे। विपक्ष के नेता चलावाड़ी नारायणस्वामी इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं हैं। उन्होंने इसे 'सिद्दारमैया का तुष्टीकरण वाला राजनैतिक खेल' करार दिया और सवाल उठाया, "जो मामले पहले से अदालत में चल रहे हैं, उन्हें कैसे वापस लिया जा सकता है?" कैबिनेट द्वारा लिए गए इस फैसले से 100 से ज्यादा लोगों को फायदा होने वाला है। विधानसभा अध्यक्ष यू टी खड़ेर ने भी इस फैसले का समर्थन किया है।