कर्नाटक हाई कोर्ट ने BNS पर सुनाया अहम फैसला, कहा- घूरने को नहीं माना जा सकता यौन संबंध की मांग
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने साफ किया है कि किसी महिला को गलत नजर से देखने भर से भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत उसे यौन संबंध की मांग नहीं माना जाएगा। यह मामला तब सामने आया जब एक व्यक्ति को कथित उत्पीड़न के आरोप में अदालत में पेश किया गया। हालांकि, उस पर लगे अन्य आरोप हटा दिए गए थे और सिर्फ गलत नजर से देखने का आरोप ही बचा था।
BNS आरोपों के लिए सबूतों की कमी
मुख्य आरोप वापस लिए जाने के बावजूद, BNS की धारा 75(1)(ii) और धारा 351(2) के तहत मामले चलते रहे। न्यायालय ने इस पर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इन आरोपों के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि कानूनी मामलों में खासकर उत्पीड़न से जुड़े मुकदमों में, ठोस सबूत होना बेहद जरूरी होता है।