उत्तराखंड का ये शहर क्यों धंस रहा है? 65 प्रतिशत घर खतरे में, सैकड़ों बेघर
उत्तराखंड का जोशीमठ शहर वाकई में धंस रहा है। साल 2023 की शुरुआत से ही यहां के घरों, सड़कों और मंदिरों तक में बड़ी-बड़ी दरारें साफ दिखने लगीं। इन दरारों के चलते सैकड़ों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर जाना पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, शहर के लगभग 65 प्रतिशत घर इस संकट की चपेट में आ चुके हैं।
जोशीमठ की भौगोलिक स्थिति, निर्माण और जलवायु खतरे
जोशीमठ दरअसल पुराने भूस्खलन के मलबे पर बसी ढीली जमीन पर टिका है, जिसकी वजह से यह इलाका बेहद संवेदनशील और नाजुक है। सालों से यहां हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और सड़क चौड़ीकरण जैसे निर्माण बेरोकटोक होते रहे हैं। इसके साथ ही, जमीन के अंदर पानी के रिसाव ने भी हालात को और बिगाड़ दिया है। विशेषज्ञों ने साल 1978 में ही इन खतरों से आगाह कर दिया था। अब तो जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने से जोशीमठ जैसे पूरे हिमालयी क्षेत्र के शहरों में अस्थिरता लगातार बढ़ती जा रही है।