जमीयत प्रमुख महमूद मदनी का विवादित बयान, कहा- अत्याचार होगा तो जिहाद होगा
क्या है खबर?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी ने विवादित बयान देकर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने न्यायपालिका और सरकार पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाते हुए कहा, "अगर अत्याचार होगा, तो जिहाद होगा।" उनकी इस टिप्पणी की भाजपा नेता और विधायक रामेश्वर शर्मा ने तीखी आलोचना की है और उन पर मुसलमानों को भड़काने और संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने का आरोप लगाया है।
आलोचना
मदनी की न्यायपालिका और सरकार की आलोचना
मदनी ने आरोप लगाया कि बाबरी मस्जिद और तीन तलाक सहित हाल के अदालती फैसले सरकार से प्रभावित थे। उन्होंने कहा, "ऐसे कई फैसलों ने संविधान में अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों का खुलेआम उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट को सर्वोच्च तभी तक कहा जा सकता है जब तक वहां संविधान की रक्षा होती है।" उन्होंने कहा भारत में 10 प्रतिशत लोग मुसलमानों का समर्थन करते हैं और 30 प्रतिशत विरोध करते हैं। इसी तरह 60 प्रतिशत चुप रहते हैं।
चेतावनी
मदनी ने दी यह चेतावनी
मदनी ने मुसलमानों से खामोश बहुसंख्यक से बात करने की अपील करते हुए कहा, "अगर ये 60 प्रतिशत लोग मुसलमानों के खिलाफ हो गए, तो देश में बहुत बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।" उन्होंने 'लव जिहाद', 'थूक जिहाद' और 'भूमि जिहाद' जैसे शब्दों को गलत व्याख्या बताते हुए उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने दोहराया, "जिहाद पवित्र था और हमेशा रहेगा। धार्मिक ग्रंथों में जिहाद का उल्लेख दूसरों की भलाई और बेहतरी के लिए किया गया है।"
राष्ट्रगीत
'वंदे मातरम' पर मदनी की टिप्पणी और भाजपा की प्रतिक्रिया
मदनी ने 'वंदे मातरम' पर भी विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा, "एक मरी हुई कौम आत्मसमर्पण कर देती है।" उन्होंने कहा, "अगर वे 'वंदे मातरम कहो' कहेंगे, तो वे इसे पढ़ना शुरू कर देंगे। यह एक मरी हुई कौम की पहचान होगी। अगर हम जिंदा कौम हैं, तो हमें हालात का सामना करना ही होगा।" शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि "भारत में नए जिन्ना उभर रहे हैं जो देश के मुसलमानों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।"