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शिकायतों की अनदेखी, टेंडर प्रक्रिया में देरी; इंदौर जल कांड में सामने आईं गंभीर लापरवाहियां
इंदौर के दूषित पानी कांड में कई स्तर पर लापरवाहियां सामने आई हैं

शिकायतों की अनदेखी, टेंडर प्रक्रिया में देरी; इंदौर जल कांड में सामने आईं गंभीर लापरवाहियां

लेखन आबिद खान
Jan 02, 2026
02:52 pm

क्या है खबर?

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने के बाद मरने वालों की संख्या 15 पहुंच गई है। हालांकि, सरकार ने आधिकारिक आंकड़ों में ये संख्या 4 ही बताई है। इसके अलावा कम से कम 200 लोग अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ड्रेनेज का पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिल गया, जिसके चलते लोग बीमार हुए। अब इस मामले में कई लापरवाहियां भी सामने आई हैं।

शिकायत

शिकायतें लगातार की गईं नजरअंदाज

दूषित पानी की सूचना 15 अक्टूबर को इंदौर महापौर की हेल्पलाइन नंबर पर की गई थी। भागीरथपुरा निवासी दिनेश भारती वर्मा ने एक मंदिर के पास स्थित कुएं के पानी में कुछ गड़बड़ी देखी। उन्होंने कहा था, "बोरवेल का पानी नाले के पानी में मिल रहा है।" नवंबर में एक अन्य निवासी शिवानी थकले ने भी पानी में एसिड मिले होने की शिकायत दर्ज कराई थी। 18 दिसंबर से निवासी लगातार पानी में बदबू आने की शिकायत कर रहे थे।

अनदेखी

16 शिकायतों में से केवल 5 का हुआ समाधान

ये घटना इंदौर के भागीरथपुरा में हुई है, जो नगर निगम जोन 4 में आता है। इसमें पानी से जुड़ी 23 शिकायतें दर्ज की गईं। सहायक अभियंता योगेश जोशी को सौंपे गई 16 शिकायतों में से केवल 5 का समाधान हुआ, जबकि 7 शिकायतों को बिना कार्रवाई के बंद कर दिया गया। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला ने घटना को गंभीर आपराधिक लापरवाही बताते हुए कहा कि इससे जन स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया।

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टेंडर

पाइपलाइन के लिए 4 महीने पहले जारी हुआ टेंडर, खोला ही नहीं गया

भागीरथपुरा में पानी की नई पाइप लाइन के लिए अगस्त, 2025 में टेंडर जारी हुआ था। इसके तहत क्षेत्र में 2.40 करोड़ रुपये की लागत से नई पाइपलाइन डाली जानी थी। टेंडर के दस्तावेजों में गंदे पानी की शिकायतों का भी जिक्र था। इसके बावजूद दिसंबर तक टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। जब लोगों की मौत होने लगी और जिम्मेदारों पर आंच आई, तब जाकर आनन-फानन में टेंडर खोला गया।

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लीकेज

पीने के पानी में मिल रहा था शौचालय का दूषित पानी

भागीरथपुरा में चौकी से लगे शौचालय के नीचे मेन लाइन में लीकेज सामने आया है। अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया ने पुष्टि की कि यहीं पर दूषित पानी पीने के पानी में मिल रहा था। फिलहाल नगर निगम ने इस लीकेज को दुरुस्त कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बाद अगर समय रहते निगम लीकेज को ठीक कर देता तो कई लोगों की जान बच जाती।

रिपोर्ट

मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि- दूषित पानी से गईं जानें

महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और नर्मदा आपूर्ति शाखा की प्रयोगशाला की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि पानी में जानलेवा बैक्टीरिया था। दैनिक भास्कर से बात करते हुए मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर माधव हसानी ने बताया कि नमूनों में पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई है। पानी में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई और क्लेबसेला जैसे बैक्टीरिया मिले हैं, जिससे पेट दर्द, उल्टी-दस्त होती है।

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