भारत के 40 प्रतिशत बिजली संयंत्रों में गंभीर स्तर पर पहुंचा कोयला, क्या गहराएगा बिजली संकट?
भारत का बिजली तंत्र सचमुच गर्मी से जूझ रहा है। देश के करीब 40 फीसदी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर तक नीचे चला गया है। इसकी वजह बिजली की लगातार बढ़ती मांग और अल नीनो के कारण सामान्य से ज्यादा गर्म मौसम है। सिर्फ एक हफ्ते के अंदर ऐसे बिजली संयंत्रों की संख्या, जिनके पास जरूरत से एक चौथाई से भी कम कोयला बचा है, करीब 60 से बढ़कर 74 हो गई है।
सरकार कोयला आपूर्ति बढ़ाने में जुटी
बिजली की रोशनी बनाए रखने के लिए सरकार कोयले की डिलीवरी तेज करने में जुटी है। दरअसल, मानसून में हुई कम बारिश ने कोयले की आपूर्ति में कुछ अड़चनें पैदा कर दी थीं। भले ही नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन बढ़ रहा है , फिर भी रोजमर्रा की बिजली जरूरतों के लिए कोयला ही सबसे अहम स्रोत बना हुआ है। अगस्त में कोयले का आयात पिछले 15 महीनों में सबसे ज़्यादा रहा। बिजली कंपनियों ने अतिरिक्त ईंधन की तलाश में काफी मशक्कत की, जिससे यह साफ हो जाता है कि जब बिजली की मांग अचानक बढ़ती है, तो भारत अभी भी कोयले पर कितना निर्भर है।