सोनिया गांधी को मतदाता सूची मामले में झटका, जांच से इनकार करने वाला आदेश रद्द
क्या है खबर?
दिल्ली की एक कोर्ट ने सोमवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची मामले में आपराधिक कार्यवाही की मांग वाली याचिका खारिज की गई थी। द्वारका कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि यह आदेश पूरी तरह से निरर्थक था, जिसमें उचित कारणों का अभाव था। कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया है।
सुनवाई
29 सितंबर को होगी सुनवाई
कोर्ट ने मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि पक्षों को सुनने, जांच करने और संबंधित पुलिस अधिकारी को सुनने के बाद एक विस्तृत आदेश पारित किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत का आदेश मनमानी भरा और तर्कहीन था। मामले की सुनवाई 29 सितंबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सूचीबद्ध की गई है।
न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी न्यायिक आदेश के लिए कानून को सर्वोपरि माना जाता है।
बयान
कोर्ट ने क्या कहा?
लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि विवादित आदेश में इस बात पर कोई चर्चा नहीं हुई कि गांधी का नाम 1980, 1982 और 1983 की मतदाता सूचियों में किस क्रम में शामिल किया गया, हटाया गया या फिर से शामिल किया गया, और शिकायत को पूरी तरह से खारिज क्यों किया गया।
न्यायाधीश ने कहा कि संज्ञेय अपराध के खुलासे पर बिना कोई कारण बताए आदेश पारित करने में कोर्ट ने बिल्कुल भी विवेक का प्रयोग नहीं किया।
मामला
क्या है मामला?
कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया है कि उनका नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं।
आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता का नाम 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया, 1982 में हटा दिया गया और फिर 1983 में दोबारा से शामिल किया गया।
सोनिया पर जाली दस्तावेजों आपराधिक षड्यंत्र का आरोप लगाया गया है।