100 GW पवन ऊर्जा का लक्ष्य कागजी उलझनों में फंसा, क्या आ रहीं परेशानियां?
भारत ने 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है, मगर मौजूदा रफ्तार को देखें तो इसे हासिल करना मुश्किल लग रहा है। हालांकि, पिछले साल रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था, इसके बावजूद अभी तक सिर्फ 56 GW पवन ऊर्जा ही स्थापित हो पाई है।
इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) का कहना है कि जमीन के सौदों में अड़चनें और परियोजनाओं को पूरा करने में हो रही देरी इसका एक बड़ा कारण है।
IWTMA ने जताई मंजूरी की देरी को लेकर चिंता
IWTMA की रिपोर्ट बताती है कि राज्यों के अलग-अलग नियम और मंजूरियों में लगने वाला लंबा समय बड़ी अड़चनें हैं। 43 GW क्षमता की परियोजनाओं पर काम चल रहा है और कई और पाइपलाइन में हैं, इसके बावजूद जगह के चुनाव और कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी पूरी योजना पर पानी फेर सकती है।
सवाल है कि इस समस्या से कैसे निपटा जाए? IWTMA का सुझाव है कि सिंगल-विंडो मंजूरी व्यवस्था, जमीन के इस्तेमाल की जल्द अनुमति और बिजली ग्रिड से तेजी से जोड़ने की प्रक्रिया जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा करने से ही भारत अपने ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों को सही मायने में हासिल कर पाएगा।