सभी तरह की आपातकालीन मदद के लिए 112 पर फोन, केवल 5 राज्यों में ही पूरा हुआ काम
2019 में शुरू की गई 112 हेल्पलाइन का मकसद था कि आपातकालीन स्थिति में अलग-अलग नंबर याद रखने की झंझट खत्म हो जाए। पुलिस, आग या एंबुलेंस के लिए अलग-अलग नंबर रखने के बजाय, अब सिर्फ एक ही नंबर डायल करना होता है। यह अमेरिका के 911 नंबर जैसा ही है। लेकिन एक पेंच है। अभी सिर्फ 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों—दिल्ली, केरल, गुजरात, हरियाणा और लक्षद्वीप—में ही सभी आपातकालीन सेवाओं को 112 से जोड़ दिया गया है।
उत्तर प्रदेश 112 से पूरी तरह जुड़ने के करीब
उत्तर प्रदेश लगभग तैयार है, बस एक और सेवा को जोड़ना बाकी है। इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने बाकी सभी राज्यों के लिए एक डेडलाइन तय की थी। तो फिर 112 ही क्यों? इसे डायल करना बहुत आसान है, पुराने फोन पर भी चलता है और फोन लॉक होने पर भी काम करता है। यह नंबर पहले से ही पूरे यूरोप में इस्तेमाल हो रहा है। 2012 के दिल्ली गैंगरेप केस के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी ने एक एकीकृत प्रणाली बनाने की सिफारिश की थी, जिसके बाद भारत ने 112 को चुना। इसका मकसद है कि हर किसी को मदद जल्दी और आसानी से मिल सके।