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भारतीय नौसेना को मिलेंगे 40,000 करोड़ रुपये के 8 स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत, जानिए क्या है खासियत
भारतीय नौसेना के लिए 40,000 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारतीय नौसेना को मिलेंगे 40,000 करोड़ रुपये के 8 स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत, जानिए क्या है खासियत

लेखन गजेंद्र
Oct 30, 2026
01:58 pm

क्या है खबर?

केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना के लिए 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना को मंजरी दी है, जिससे 8 नेक्स्ट-जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) यानी अगली पीढ़ी के आधुनिक युद्धपोत बनाए जाएंगे। यह हाल के दिनों में उच्च स्तरीय मंज़ूरी पाने वाली पहली बड़ी रक्षा परियोजना है, जिसे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने मंजूरी दी है। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों में 2 शिपयार्ड 8 युद्धपोत के अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे।

परियोजना

नौसेना को 2030 तक 8 में से पहला युद्धपोत मिल जाएगा

युद्धपोत को 2 सरकारी शिपयार्ड बनाएंगे, जिसमें कोलकाता में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शामिल है।

इस परियोजना से नौसेना के सतही बेड़े को मजबूती मिलने की उम्मीद है, साथ ही देसी युद्धपोत मैन्युफैक्चरिंग को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब अनुबंध पर हस्ताक्षर होते ही काम शुरू हो जाएगा। संभावना है कि नौसेना को 8 में से पहला युद्धपोत 2023 तक मिल जाएगा।

खासियत

NGC क्या है?

नेक्स्ट-जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) यानी अगली पीढ़ी के आधुनिक युद्धपोत छोटे, तेज, भारी हथियारों से लैस युद्धपोत होते हैं जिनका इस्तेमाल तट रक्षा, सर्विलांस और गश्त के लिए किया जाता है।

ये दूसरे बड़े युद्धपोत फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर से छोटे होते हैं लेकिन कई तरह के हथियार और सेंसर ले जा सकते हैं।

ये छोटे आकार के युद्धपोतों की श्रेणी है, जो समुद्र में दुश्मन के जहाजों, पनडुब्बियों और हवाई हमलों से मुकाबला करने में सक्षम होगी।

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खासियत

भारतीय NGC का खासियत

भारतीय नौसेना के लिए जो 8 NGC बनाए जाएंगे, वो 2,000 टन के हाई-स्पीड सरफेस कॉम्बैटेंट होंगे, जिनकी रफ्तार लगभग 30 नॉट्स होगी।

इनमें नौसेना द्वारा भारत में विकसित बिल्कुल नया स्टेल्थ डिजाइन होगा, जिसमें एडवांस्ड शिपबिल्डिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके स्टील्थ फीचर्स, आधुनिक हथियार, सेंसर, और बेहतरीन गतिशीलता से नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इस परियोजन में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा।

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