सेना को मिले 106 आत्मघाती ड्रोन: 180 किलोमीटर रेंज, 450 किलोमीटर की रफ्तार; जानें खासियत
क्या है खबर?
भारतीय सेना को टर्बोजेट इंजन से चलने वाले 106 कामिकाजे ड्रोन मिले हैं। इन ड्रोन को पीसकीपर (अग्निवेग) नाम दिया गया है, जिन्हें स्वदेशी रक्षा कंपनी SMPP ने बनाया है। ये ड्रोन दुश्मन के इलाके में 180 किलोमीटर अंदर तक जाकर ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम हैं। हालिया समय में युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सेना के लिए ये ड्रोन अहम हैं। आइए इनकी खासियत जानते हैं।
ड्रोन
क्या है ड्रोन की खासियत?
रक्षा कंपनी ने बताया कि ड्रोन की परिचालन क्षमता 180 किलोमीटर तक है। यानी ये 180 किलोमीटर भीतर दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं। इनकी अधिकतम गति 450 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह स्वायत्त रूप से सैन्य ढांचे, लॉजिस्टिक्स हब, कमांड सेंटर, रडार स्टेशन और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों पर सटीक हमला कर सकते हैं। सेना को फिलहाल 100 ऑपरेशनल ड्रोन और 6 प्रशिक्षण ड्रोन मिले हैं, जिन्हें मानवरहित युद्ध क्षमता में अहम माना जा रहा है।
जैमिंग
जैमिंग और स्पूफिंग का भी नहीं होगा असर
कंपनी का कहना है कि इन ड्रोन पर न जैमिंग का असर होगा, न कोई स्पूफिंग के जरिए इन्हें लक्ष्य से भटका सकेगा। परीक्षण के दौरान अग्निवेग ने जैमिंग और स्पूफिंग वाले माहौल के बीच 5 मीटर से कम का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) हासिल किया है। यानी अगर एक ही लक्ष्य पर 100 ड्रोन दागे जाएं, तो उनमें से 50 लक्ष्य के 5 मीटर के दायरे को ही निशाना बनाएंगे।
बयान
6 महीने में ही हुई ड्रोन की डिलीवरी
SMPP के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और निदेशक आशीष कंसल ने कहा, "6 महीने में सेना को अग्निवेग की सफल डिलीवरी SMPP और भारत के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आधुनिक युद्ध में सटीकता, स्वायत्तता और वहनीयता की भूमिका बढ़ती जा रही है, और पीसकीपर जैसी प्रणालियां युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण शक्ति गुणक बनती जा रही हैं। पीसकीपर कार्यक्रम SMPP के विविध रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में चल रहे विकास को दर्शाता है।"
आत्मघाती ड्रोन
क्या होते हैं आत्मघाती ड्रोन?
आत्मघाती ड्रोन को कामिकेजे ड्रोन भी कहा जाता है। सेना की भाषा में इसे लॉयटरिंग म्यूनिशंस कहते हैं। दरअसल, सामान्य ड्रोन लक्ष्य की ओर विस्फोटक दागते हैं, लेकिन आत्मघाती ड्रोन खुद ही जाकर लक्ष्य से टकरा जाते हैं। ये ड्रोन लॉन्च करने के बाद देर तक हवा में मंडराते हैं फिर कैमरे और सेंसर से लक्ष्य की पहचान करते हैं और फिर उससे टकरा जाते हैं। इस प्रक्रिया में ड्रोन में लगा विस्फोटक फट जाता है।