155 करोड़ का 'मोबाइल' ड्रोन सुरक्षा कवच, भारत अब हर घुसपैठ को करेगा नाकाम
भारत सरकार नए मोबाइल एंटी-ड्रोन इकाइयों में 155 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इन इकाइयों से सीमाओं, शहरों और VVIP इलाकों की सुरक्षा और भी मजबूत होगी। इस बजट का बड़ा हिस्सा सीमाओं की सुरक्षा पर खर्च होगा, वहीं कुछ हिस्सा शहरों की पुलिस व्यवस्था के लिए भी रखा गया है।
ये सिस्टम उन ड्रोन को पहचानेंगे और निष्क्रिय करेंगे जो बिना इजाजत के उड़ते हैं। ये ड्रोन को देख सकते हैं, उनकी हरकतों पर नजर रख सकते हैं और उन्हें गिरा भी सकते हैं। इनसे तस्करी और जासूसी जैसी समस्याओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सकेगा।
'इंद्रजाल रेंजर' तकनीक से संचालित होने वाली मोबाइल इकाइयां
ये मोबाइल इकाइयां जरूरत के हिसाब से तुरंत बदली जा सकती हैं, ताकि ये किसी भी नई चुनौती के हिसाब से ढल सकें। ये इंद्रजाल ऑटोनॉमस डिफेंस सिस्टम्स की 'इंद्रजाल रेंजर' तकनीक पर आधारित हैं। इसमें कंपनी के 'स्काईOS' प्लेटफॉर्म और अलग-अलग सेंसर इस्तेमाल होते हैं, जो 3 स्तर की सुरक्षा मुहैया कराते हैं।
पहले स्तर पर ये ड्रोन के सिग्नल जाम कर देते हैं, दूसरे में एक वर्चुअल दीवार खड़ी करते हैं, और अगर कोई ड्रोन बचकर निकल जाए तो उसे तीसरे स्तर पर पकड़ लिया जाता है। भारत नई तकनीकों से पैदा होने वाले खतरों से हमेशा एक कदम आगे रहने की कोशिश कर रहा है, और यह पहल इसी का हिस्सा है।