पड़ोसी देशों में दौड़ती दिखेगी की वंदे भारत ट्रेन, निर्यात करने की तैयारी
भारत अपनी वंदे भारत ट्रेनों को एक्सपोर्ट करने की तैयारी में है। इससे बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों को बुलेट ट्रेनों के भारी खर्च के बिना एक आधुनिक रेल व्यवस्था मिल सकेगी।
RITES और भारतीय रेलवे ने मिलकर इसका जो नया स्टैंडर्ड गेज वर्जन बनाया है, वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से है और कई पड़ोसी देशों की नजर इस पर पहले ही पड़ चुकी है।
90 फीसदी पुर्जे भारत में होते हैं तैयार
ये वंदे भारत ट्रेनें पहले से मौजूद और बेहतर बनाई गई पटरियों पर भी आसानी से चल सकती हैं। इसी वजह से उन देशों के लिए ये काफी किफायती साबित होती हैं, जो बड़े खर्च के बिना अपनी परिवहन व्यवस्था को सुधारना चाहते हैं।
एक 16-कोच वाली ट्रेन को बनाने में लगभग 130 से 150 करोड़ रुपये का खर्च आता है और इसके 90 फीसदी पुर्जे भारत में ही तैयार होते हैं।
यह पहल 'मेक इन इंडिया' अभियान को बढ़ावा देती है और कम खर्च वाली तकनीक के जरिए दूसरे विकासशील देशों के साथ भारत के रिश्तों को और मजबूत करती है।