परमाणु क्रांति की तैयारी: 2047 तक 100 GW ऊर्जा के लिए भारत जुटा रहा 'पीला सोना'
भारत दुनिया भर से यूरेनियम हासिल करने के लिए बड़े कदम उठा रहा है, ताकि 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा का उत्पादन किया जा सके। उज्बेकिस्तान के साथ लंबे समय तक यूरेनियम की सप्लाई के लिए बातचीत चल रही है।
ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ भी ऐसे ही समझौते हुए हैं। इन सबका मकसद है कि भविष्य के परमाणु रिएक्टर्स को लगातार ईंधन मिलता रहे और वे काम करते रहें।
यूरेनियम के लिए भारत की यह वैश्विक तलाश देश के नए नियमों से भी मेल खाती है, जिनके तहत अब प्राइवेट कंपनियां भी परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा सकेंगी।
भारत के यूरेनियम करार और शांति एक्ट
भारत उज्बेकिस्तान के साथ एक लंबी अवधि के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहा है। यह 2019 के उनके मौजूदा समझौते को आगे बढ़ाएगा, ताकि ईंधन की सप्लाई लगातार बनी रहे।
ऑस्ट्रेलिया ने अपने 2014 के नागरिक परमाणु सहयोग समझौते के तहत एक प्रशासनिक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया है। यह व्यवस्था ऑस्ट्रेलिया से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम निर्यात करने का आधार बनेगी, जो इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की सुरक्षा निगरानी में होगा।
कनाडा की केमेको कॉर्पोरेशन और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच भी नौ साल का एक समझौता हुआ है। इसके तहत 2027 से 2035 के बीच भारत को लगभग 2.6 अरब डॉलर मूल्य का करीब 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम अयस्क कंसन्ट्रेट मिलेगा। इसके अलावा, साल 2025 के 'शांति एक्ट' के आने से सरकारी एकाधिकार खत्म हो गया है। अब टाटा पावर जैसी प्राइवेट कंपनियां भी भारत के परमाणु भविष्य को आकार देने में अपना योगदान दे सकेंगी।