होर्मूज जलडमरूमध्य संकट में भी भारत का मास्टरस्ट्रोक, बढ़ती कीमतों के बीच स्थिर रखे पेट्रोल-डीजल के दाम
2022 से 2026 के दौरान जहां दुनिया के बड़े देशों में ईंधन के दाम आसमान छू रहे थे, वहीं भारत में तस्वीर कुछ और ही थी। यहां रिटेल फ्यूल की कीमतें घटाई गईं, जबकि उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। सरकारी रिपोर्ट बताती है कि भारत ने एक्साइज ड्यूटी में कई बार कमी की। इनमें 27 मार्च, 2026 को की गई एक बड़ी कटौती शामिल है, जब 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई। यह फैसला होर्मूज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट से ठीक पहले लिया गया था। इस कदम से डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी शून्य हो गई और ग्राहकों को कीमतों के भारी उछाल से बचा लिया गया।
होर्मूज संकट के बीच भारत ने ईंधन के दाम स्थिर रखे
होर्मूज संकट के दौरान भारत ने 76 दिनों तक रिटेल फ्यूल के दाम बिल्कुल नहीं बदले। यह तब हुआ जब सरकारी तेल कंपनियों को इस दौरान भारी नुकसान उठाना पड़ा। जब मई 2026 में कीमतों में बढ़ोतरी का समय आया, तो यह वृद्धि सिर्फ 5 प्रतिशत तक ही सीमित रही। यह उन देशों के मुकाबले बहुत कम था, जहां कुछ जगह तो कीमतें 90 प्रतिशत तक उछल गई थीं। रिपोर्ट में भारत के इस कदम को खाड़ी देशों के बाहर के बड़े आर्थिक देशों में सबसे कम बढ़ोतरी बताया गया है।