अमेरिका से जेवलिन एंटी-टैंक प्रणाली खरीदेगा भारत, जानें खासियत
क्या है खबर?
भारत अमेरिका से मध्यम दूरी की टैंक रोधी हथियार प्रणाली जेवलिन खरीदने की योजना बना रहा है। यह जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले साल नवंबर में ही भारत को FGM-148 जेवलिन हथियार प्रणाली की बिक्री को मंजूरी दी थी। राजदूत गोर ने कह कि यह अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और सह-उत्पादन की संभावनाओं के द्वार खोलता है।
बयान
गोर बोले- भारत-अमेरिका में सहयोग उच्चतम स्तर पर
भारत में अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा, 'बड़ी खबर! भारत लड़ाई में परखा हुआ जेवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। जैसा कि अमेरिका के रक्षा मंत्री ने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में बताया था, यह अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है और इससे मिलकर उत्पादन की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं। हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है!'
मंजूरी
पिछले साल अमेरिका ने दी थी मंजूरी
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, नवंबर 2025 में अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को करीब 824 करोड़ रुपये के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी।
तब अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) ने कहा था कि भारत ने 100 जैवलिन मिसाइल प्रणाली और 216 एक्सकैलिबर सामरिक प्रक्षेपास्त्रों का अनुरोध किया था।
इससे ठीक पहले भारत ने अपने स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के इंजनों का ऑर्डर दिया था।
जेवलिन
क्या है जेवलिन एंटी-टैंक प्रणाली?
जेवलिन को लॉकहीड मार्टिन और RTX ने मिलकर बनाया है। यह कंधे से दागे जाने वाली पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल बख्तरबंद लक्ष्यों के खिलाफ किया जाता है।
यह एक उन्नत और मध्यम दूरी की 'फायर-एंड-फॉरगेट' तकनीक पर आधारित निर्देशित मिसाइल प्रणाली है।
दागे जाने के बाद ये स्वचालित तरीके से अपने लक्ष्य का पीछा करती है, जिससे सैनिक को कवर लेने और जवाबी हमले से बचने में मदद मिलती है।
खासियत
क्या है जेवलिन प्रणाली की खासियत?
जेवलिन की सबसे बड़ी विशेषता है कि ये बख्तरबंद वाहन पर ऊपर से हमला करने में सक्षम है, जहां कवच सुरक्षा आम तौर पर कमजोर होती है।
हल्का होने के चलते सैनिक इसे दागने के फौरन बाद अपनी स्थिति बदल सकते हैं।
इसके सॉफ्ट-लॉन्च डिजाइन के कारण इसे इमारतों और बंकरों सहित बंद संरचनाओं से भी सुरक्षित रूप से दागा जा सकता है।
ये 2,500 मीटर की रेंज में अपने लक्ष्य को पहचान कर उसे बर्बाद करने में सक्षम है।