#NewsBytesExplainer: भारत-पाकिस्तान के जहाज समुद्र में टकराए, क्या कहता है 1991 का समझौता?
क्या है खबर?
अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत से पाकिस्तान की नौसेना का एक जहाज टकरा गया। इस मामले पर भारत ने सख्त कदम उठाते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के सबसे वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया। भारत ने राजनयिक के सामने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के 'गैर-पेशेवर' आचरण पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने बयान में 1991 में दोनों देशों के बीच हुए एक समझौते का भी जिक्र किया। आइए इसके बारे में जानते हैं।
घटना
सबसे पहले घटना के बारे में जानिए
समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम को उत्तरी अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत और पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज के बीच टक्कर हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी जहाज एक नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोत के पास बेहद करीब तेज गति से आया और उसने गैर-पेशेवर और असुरक्षित तरीके से हरकतें कीं।
इसके कारण टक्कर हो गई। सूत्रों के अनुसार, किसी नुकसान की खबर नहीं है।
जहाज
किन 2 जहाजों के बीच हुई टक्कर?
ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी जहाज का नाम PNS हुनैन है। इसे समुद्री निगरानी और गश्त के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
ये यारमूक श्रेणी का निगरानी पोत है और 98 मीटर लंबा है। 2024 में इसे पाकिस्तानी नौसेना में शामिल किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, टक्कर में इसको नुकसान पहुंचा है।
हालांकि, घटना में भारतीय नौसेना का कौनसा जहाज शामिल था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
बयान
विदेश मंत्रालय ने 1991 के किस समझौते का जिक्र किया?
विदेश मंत्रालय ने कहा, "हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई इस घटना से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन पाकिस्तानी नौसेना के जहाज का व्यवहार अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की अग्रिम सूचना देने के समझौते के अनुच्छेद 10 का सीधा उल्लंघन था। इस्लामाबाद में भारत के चार्ज डी'अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।"
समझौता
क्या है 1991 का समझौता?
भारत और पाकिस्तान ने 6 अप्रैल, 1991 को नई दिल्ली में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो 19 अगस्त, 1992 को लागू हुआ था।
इसके तहत, दोनों देशों को सीमा के निकट होने वाले प्रमुख सैन्य अभ्यासों और गतिविधियों की पूर्व सूचना एक-दूसरे को देनी होगी।
साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे अभ्यास न तो दूसरे पक्ष को लक्षित कर किए जाएं और न ही उकसावे के तौर पर, ताकि गलतफहमियों से बचा जा सके।
जहाज
समझौते में जहाजों को लेकर क्या कहा गया है?
समझौते का अनुच्छेद 10 अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौसेना सुरक्षा को नियंत्रित करता है।
इसमें कहा गया है, "दूसरे देश के नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां एक दूसरे से 3 समुद्री मील से कम दूरी पर नहीं होनी चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालन के दौरान कोई दुर्घटना न हो।"
अनुच्छेद 10 एक तकनीकी सुरक्षा उपाय है, जिसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अनजाने में होने वाली टक्करों या निकट मुठभेड़ों को रोकना है।
लड़ाकू विमान
लड़ाकू विमानों को लेकर क्या प्रावधान हैं?
समझौते के तहत लड़ाकू विमानों को दूसरे देश के हवाई क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में उड़ान भरने की मनाही है।
यह प्रतिबंध लड़ाकू विमानों, बमवर्षक विमानों, टोही विमानों, सैन्य प्रशिक्षण विमानों और सशस्त्र हेलीकॉप्टरों पर लागू होता है।
हालांकि, भारत में जम्मू, पठानकोट, अमृतसर और सूरतगढ़ हवाई अड्डों और पाकिस्तान में पसूर, लाहौर, वेहारी और रहीमयार खान हवाई अड्डों से उड़ान भरने वाले विमानों को 10 किमी की सीमा से छूट दी गई है।