सड़कों पर 1.8 लाख मौतें: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, पैदल यात्रियों को कब मिलेगा सुरक्षित रास्ता?
2019 से 2024 के बीच हिंदुस्तान की सड़कों पर 1.80 लाख से ज्यादा पैदल यात्रियों ने अपनी जान गंवाई है। यानी, हर साल औसतन 30,500 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इसी अवधि में, नेशनल हाईवे पर हुईं कुल मौतों में करीब 31 प्रतिशत पैदल यात्री थे।
अकेले 2024 की बात करें तो, पैदल यात्रियों की 54 प्रतिशत मौतें दोपहिया और कारों की टक्कर से हुईं, जिसमें 19,680 लोगों की जानें गईं। तमिलनाडु, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं, और बड़े शहर भी इससे अछूते नहीं रहे। 53 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में भी 4,328 पैदल यात्रियों की मौतें दर्ज की गईं, जो कुल मौतों का 11.8 प्रतिशत है।
सुप्रीम कोर्ट चाहता है फुटपाथ को लेकर बने कानून
इन भयावह आंकड़ों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। अदालत ने याद दिलाया कि सुरक्षित आवाजाही संविधान के तहत हर नागरिक का अधिकार है। अदालत चाहती है कि फुटपाथों को बेहतर बनाया जाए और उन्हें कानूनी तौर पर अनिवार्य किया जाए। विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि भारत को सही साइनबोर्ड और बेहतर सड़क डिजाइन की जरूरत है ताकि लोग हर रोज अपनी जान जोखिम में डाले बिना चल सकें।