जमीन के हर टुकड़े की बनेगी अलग पहचान, सरकार ने शुरू किया 'भू-आधार'
भारत ने हाल ही में DILRMP 3.0 नाम का एक नया कार्यक्रम शुरू किया है। इसका मकसद देश की हर जमीन को उसका अपना 14-अंकीय 'भू-आधार' नंबर देना है।
अगले 5 सालों के लिए इस पर 565.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस कार्यक्रम का लक्ष्य एक ऐसा डिजिटल और GIS-आधारित सिस्टम बनाना है, जिससे जमीन के रिकॉर्ड को संभालना और उन तक पहुंचना आसान हो जाए।
राज्य बनाएंगे राष्ट्रीय भूमि स्टैक
राज्य अब नक्शों, जमीन के मालिकाना हक की जानकारी और रजिस्ट्रेशन से जुड़े डाटा को एक राष्ट्रीय सिस्टम में जोड़कर 'लैंड स्टैक' तैयार करेंगे।
खास बात यह है कि स्थानीय नियंत्रण राज्यों के पास ही बना रहेगा। इस प्रोजेक्ट में शहरी जमीन की मैपिंग को 'नक्शा' पहल के तहत लाया जाएगा।
इसके अलावा, 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को अपग्रेड करके रजिस्ट्रेशन 'सेवा केंद्रों' में बदला जाएगा।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया है कि इस कदम से किसानों को कर्ज लेने में काफी सहूलियत होगी, और सभी लोगों को संपत्ति के स्पष्ट रिकॉर्ड मिल सकेंगे। इस पूरे काम का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, और इसकी प्रगति पर एक डैशबोर्ड के जरिये लगातार नजर रखी जाएगी।