भारत ने सिंधु जल संधि पर की मध्यस्थता न्यायालय के फैसले की आलोचना, जानिए क्या कहा
क्या है खबर?
भारत ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रैटल जलविद्युत परियोजनाओं पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए फैसले को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान में सिंधु जल संधि स्थगित है, इसलिए भारत संधि के तहत अपने किसी भी दायित्व को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसे में मध्यस्थता न्यायालय की ओर से दिया गया फैसला पूरी तरह से अवैध है। आइए जानते हैं भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी है।
फैसला
मध्यस्थता न्यायालय ने क्या दिया फैसला?
किशनगंगा और रैटल जलविद्युत परियोजनाओं पर पाकिस्तान ने कड़ी आपत्ती जताने और इस मामले को हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय में चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि भारत सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहा है। इस पर मध्यस्थता न्यायालय ने भारत को 9 फरवरी तक दोनों जलविद्युत संयंत्रों की परिचालन लॉगबुक जमा करने या ऐसा करने से इनकार करने का औपचारिक स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी जीत मान रहा है।
प्रतिक्रिया
भारत ने क्या दी फैसले पर प्रतिक्रिया?
भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'कोई भी मध्यस्थता न्यायालय और विशेष रूप से यह अवैध रूप से गठित मध्यस्थता निकाय, जिसका कानून की दृष्टि में कोई अस्तित्व नहीं है, भारत द्वारा एक संप्रभु के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए की गई कार्रवाइयों की वैधता की जांच करने का अधिकार नहीं रखता है।' मंत्रालय ने कहा, 'इस मामले में मध्यस्थता न्यायालय द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय या फैसला अवैध है।'
खारिज
भारत मध्यस्थता न्यायालय के निर्णय को करता है खारिज
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, 'भारत इस तथाकथित पूरक निर्णय को स्पष्ट रूप से खारिज करता है, जैसा कि उसने इस निकाय के सभी पूर्व निर्णयों को भी खारिज किया है।' मंत्रालय ने कहा, 'पाकिस्तान के इशारे पर किया गया यह नाटक आतंकवाद के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी भूमिका के लिए जवाबदेही से बचने का उसका एक और हताश प्रयास है। पाकिस्तान द्वारा इस मनगढ़ंत मध्यस्थता तंत्र का सहारा लेना अंतरराष्ट्रीय मंचों को धोखा देने के अनुरूप है।'