CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का सार्वजनिक महाभियोग, खड़गे के घर लगी संसद
क्या है खबर?
विपक्षी गठबंधन INDIA ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर 'सड़क पर संसद' कार्यक्रम में CEC ज्ञानेश के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। पूर्व स्पीकर मीरा कुमार ने इस नकली संसद की अध्यक्षता कीं। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना जरूरी है। इस दौरान 15 से ज्यादा विपक्षी पार्टियों के नेता मौजूद रहे।
खड़गे का बयान
खड़गे बोले- लोकतंत्र को बचाने के लिए प्रस्ताव लाए
खड़गे ने कहा, "संविधान के तहत नागरिकों को जो वोट का अधिकार मिला वह खतरे में हैं। इसलिए हम लोकतंत्र और प्रजातंत्र के लिए लड़ रहे हैं। आज युवा खतरे में हैं क्योंकि ज्ञानेश कुमार सीधे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देश पर चुनाव आयोग को चला रहे हैं। हमने 7 महीने पहले उन्हें हटाने का प्रस्ताव दोनों सदन में रखा था, लेकिन हमारे नोटिस खारिज किए गए। आज हम फिर लोकतंत्र को बचाने के लिए यह प्रस्ताव लाए हैं।"
आरोप
खड़गे ने ज्ञानेश कुमार पर 6 आरोप लगाए
खड़गे ने ज्ञानेश कुमार पर 6 आरोप लगाए। इनमें चुनावों में हेरफेर करने की साजिश रचने, मतदाता सूची से 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने, संसद की मंजूरी के बिना 'फॉर्म 6' में बदलाव करने और 'ECINET' के जरिए मतदाता सूचियों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का आरोप शामिल है।
इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य 2 चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर फैसले लिए।
दुश्मनी
खड़गे बोले- हमारी CEC से कोई निजी दुश्मनी नहीं
खड़गे ने आगे कहा, "हमारी CEC से निजी दुश्मनी नहीं है। मोदी ने सत्ता में बने रहने के लिए हर साजिश रची। चुनावी बॉन्ड, सांसद चोरी और अब वोट चोरी। हमारे पास सैकड़ों उदाहरण है। 145 विपक्षी को सस्पेंड कर यह विधेयक पारित किया गया। जो देशहित में काम कर रहे थे, उन्हें संसद से बाहर कर यह कानून पारित करवाया गया। यह कानून चुनाव आयुक्त को ऐसी सुरक्षा देता है जो राष्ट्रपति को भी नहीं है।"
बयान
मीरा कुमार बोलीं- मतदाता सूची से अनुचित तरीके से नाम काटे जा रहे
मीरा कुमार ने कहा, "आपने देखा है पिछले कुछ सालों में जिन्हें वोट देना चाहिए उनके नाम वोटर लिस्ट से अनुचित ढंग से काटे जा रहे हैं। जब ये सवाल उठाया जाता है कि उसमें कोई पारदर्शिता नहीं दिखाई देती कि क्यों किया गया और कोई जवाबदेही भी नहीं मिलती। इसलिए यह निश्चित किया गया कि एक महाभियोग का प्रस्ताव लाया जाए ज्ञानेश को उनके पद से हटाने के लिए।"
उपस्थिति
बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल?
कार्यक्रम में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत 19 विपक्षी पार्टियों ने हिस्सा लिया। कई वामपंथी पार्टियों ने भी इस प्रतीकात्मक महाभियोग में हिस्सा लिया।
इसके अलावा सामाजिक समूह, छात्र संगठन और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से प्रभावित लोग भी मौजूद रहे।
इस दौरान अलग-अलग पार्टियों और समूहों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।
पहले यह कार्यक्रम शुक्रवार को होने वाला था, लेकिन बारिश के कारण रद्द कर दिया गया।