क्या रही NVS-03 सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंग की वजह? ISRO प्रमुख नारायणन ने बताया
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार (30 अक्टूबर) रात को नया नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस सफलता के पीछे एजेंसी की लॉन्च योजना में बदलाव रहा है। ISRO प्रमुख वी नारायणन ने शनिवार को बताया कि मिशन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और पिछली तकनीकी बाधाओं से बचने के लिए NVS-03 उपग्रह को 3 पाइरो वाल्व खुले रखकर संचालित किया गया था। बता दें कि इस मिशन का उद्देश्य देश के नेविगेशन सिस्टम NavIC को मजबूत करना है।
कारण
इस कारण उठाया गया यह कदम
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नारायणन ने बताया कि यह साहसिक तकनीकी निर्णय ISRO के पूर्व प्रमुख किरण कुमार की अध्यक्षता वाली एक राष्ट्रीय स्तर की समिति द्वारा किए गए कठोर कंपन (वाइब्रेशन) और शॉक परीक्षणों के बाद लिया गया था।
अंतरिक्ष यान के प्रणोदन (प्रोपल्शन) में पायरो वाल्व बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
गौरतलब है कि 2025 में लॉन्च किया गया NVS सीरीज का दूसरा अंतरिक्ष यान NVS-02 विफल होने के बाद यह बदलाव किया गया था।
असफलता
असफलता से मिली सीख
एक उच्च-स्तरीय समिति ने गहन विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि ऑर्बिट बढ़ाने (कक्षा ऊपर उठाने) के लिए इस्तेमाल होने वाले इंजन की ऑक्सीडाइजर लाइन के पायरो वाल्व तक ड्राइव सिग्नल नहीं पहुंच पाया था।
इस साल फरवरी में ISRO ने पैनल का हवाला देते हुए बताया कि इसका सबसे संभावित कारण कनेक्टर के कम से कम एक संपर्क (मुख्य और बैकअप) का अलग हो जाना था।
समस्या से बचने के लिए पायरो वाल्व पहले से खुले रखे गए।
सटीकता
मिशन ने लॉन्च में हासिल की सटीकता
नारायणन ने सटीकता पर जोर देते हुए कहा, "170.36 किलोमीटर के (योजनाबद्ध) पेरिगी (पृथ्वी के सबसे करीब का बिंदु) के मुकाबले, 170.31 किलोमीटर मिला है।"
उन्होंने बताया, "37,247 किलोमीटर के (योजनाबद्ध) एपोजी (पृथ्वी से सबसे दूर का बिंदु) के मुकाबले हमने 38,080 किलोमीटर हासिल किया है।"
आगे कहा, "दुनियाभर के लॉन्च वाहनों में से यह सबसे बेहतरीन सटीकता के उदाहरणों में से एक है।"
भारत की 5 महीने में NVS-04 और 10 महीने में NVS-05 लॉन्च करने की योजना है।