केंद्र सरकार ने एनहाइड्रस अमोनिया को खाद के रूप में इस्तेमाल करने की दी मंजूरी, किसानों को राहत
केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए एनहाइड्रस अमोनिया को खाद के रूप में इस्तेमाल करने को हरी झंडी दे दी है। इसका मकसद आयातित यूरिया पर देश की निर्भरता कम करना है। 23 जुलाई को हुई इस घोषणा के बाद अब अगले 3 साल तक कंपनियां अमोनिया आधारित खाद बना सकेंगी। अमोनिया में 82 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, जबकि यूरिया में यह मात्रा केवल 46 प्रतिशत ही है। इससे देश में खाद की सप्लाई बढ़ सकती है। हालांकि, इसे इस्तेमाल करने के लिए मिट्टी में सावधानी से इंजेक्शन लगाना जरूरी है ताकि गैस लीक न हो।
अतिरिक्त अमोनिया और ICAR के परीक्षण
इसे सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए, यूरिया प्लांट से निकलने वाली अतिरिक्त अमोनिया का इस्तेमाल जटिल खाद बनाने में किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने रबी 2026 सीजन में धान की फसल पर हरी अमोनिया का परीक्षण किया। इसके नतीजे काफी अच्छे हैं, लेकिन इन्हें और बेहतर बनाने की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) की रिसर्च और डेवलपमेंट शाखा NETRA, कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके आंध्र प्रदेश में एक ग्रीन यूरिया प्लांट बना रहा है। ये सब भारत को आत्मनिर्भर बनाने और महंगे आयात को कम करने के प्लान का हिस्सा है।