विदेशी निर्भरता को झटका, भारत के बिजली घर 'देसी' ऊर्जा से जगमगाए
भारत उन बिजली घरों में अब स्वदेशी कोयले का इस्तेमाल कर रहा है जो पहले कोयले के आयात पर निर्भर थे। ऐसे बिजली घरों की कुल 18.7 गीगावाट क्षमता में से करीब 5.7 गीगावाट क्षमता अब स्थानीय कोयले पर चल रही है। इस क्षमता को आधे से ज्यादा करने के लिए परीक्षण भी चल रहे हैं। यह बदलाव दो मुख्य कारणों से संभव हुआ है: पहला, नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन बढ़ा है, और दूसरा, बिजली घरों को इस तरह से अपग्रेड किया गया है कि वे भारतीय कोयले में मौजूद ज्यादा राख को भी संभाल सकें।
इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आयात में भारी गिरावट
देश में कोयले का उत्पादन बढ़ने की वजह से पिछले साल की तुलना में इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से होने वाले आयात में क्रमशः 21 प्रतिशत और 68 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। कुछ बिजली घर अब 70 प्रतिशत तक भारतीय कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें सरकार की कोशिशों का भी अहम योगदान है, खासकर कोयले की डोरस्टेप डिलिवरी जैसी पहल से। इस साल आयात पर निर्भर रहने वाले बिजली घरों ने कुल 16 मीट्रिक टन स्थानीय कोयला प्राप्त किया है।
मई में कोयले से बिजली उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़ा
मई में बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी के चलते कोयले से होने वाला बिजली उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़ गया। इसी दौरान, थर्मल कोयले का आयात चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह साफ़ दिखाता है कि नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ भारत में अपने कोयले का उत्पादन भी कितनी तेजी से बढ़ा है।