जून में 39 प्रतिशत कम बारिश, जुलाई पर भी अल नीनो का साया
IMD के अनुसार, 1901 के बाद से यह जून का 5वां सबसे सूखा महीना रहा है। इस दौरान सामान्य से 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अल नीनो है। भारत का कृषि क्षेत्र मानसून पर बहुत निर्भर करता है, क्योंकि देश की लगभग 70 फीसदी सालाना बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही होती है। ऐसे में बारिश की यह कमी किसानों और आम लोगों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
जुलाई की बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना
IMD के मुताबिक, जुलाई में भी बारिश सामान्य से कम ही रहने की संभावना है, खासकर मध्य, पश्चिमी और उत्तरी भारत में। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक मानसून बारिश मिल सकती है। मानसून ने मध्य और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में दस्तक दे दी है, लेकिन दिल्ली और आसपास के राज्यों में इसके आगमन में देरी हो रही है। अब मानसून के 4 जुलाई के करीब पहुंचने का अनुमान है, जबकि आमतौर पर यह जून के अंतिम सप्ताह तक आ जाता है।