अल नीनो का कहर: 2002 के सूखे से भी बदतर मानसून, बढ़ा जल संकट
इस साल मानसून की बारिश उम्मीद से काफी कम हो रही है। 16 जुलाई तक यह कमी 24 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो 2002 के बड़े सूखे को भी पीछे छोड़ गई है। IMD के मुताबिक, अब तक सिर्फ 224.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस समय तक आमतौर पर 295.8 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। बारिश की इस कमी ने किसानों और जल प्रबंधकों की चिंता बढ़ा दी है।
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 36 प्रतिशत की कमी
पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जहां बारिश में 36 प्रतिशत की भारी कमी देखी जा रही है। दक्षिण प्रायद्वीप में भी 26 प्रतिशत कम बारिश हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'अल नीनो' के कारण मानसून की हवाएं अपना रास्ता भटक गई हैं, जैसा सूखे वाले पिछले सालों में भी देखने को मिला था।
IMD का कहना है कि अगले हफ्ते पूर्व और पूर्वोत्तर में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन बाकी इलाकों में सूखा बना रह सकता है। यह बताता है कि मौसम के मिजाज का हमारे रोजमर्रा के जीवन पर कितना गहरा असर पड़ता है।