बेमेल मानसून: मुंबई में बाढ़, 315 जिले सूखे से बेहाल; अन्नदाताओं पर आफत
इस साल देश में मानसून का मिजाज काफी बदला-बदला सा है। एक तरफ मुंबई भारी बारिश और बाढ़ से लबालब है, वहीं दूसरी तरफ 315 कृषि प्रधान जिले पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। IMD ने जून के आखिर में शहर को ऑरेंज अलर्ट पर रखा था। पूरे देश में मानसून की बारिश में 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, सरकार किसानों की मदद के लिए आपातकालीन कदम उठा रही है।
ICAR ने 111 प्राथमिकता वाले जिलों पर ध्यान दिया
कुल 315 प्रभावित जिलों में से, 111 जिलों को 'उच्च प्राथमिकता' (हाई प्रायोरिटी) वाला माना गया है। इन जिलों में सिंचाई के साधन बहुत ही कम हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने इन जिलों के लिए खास योजनाएं बनाई हैं, जिनमें बेहतर फसलें उगाना और पानी बचाने के नए तरीके अपनाना शामिल है। इसके अलावा, कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों को खेती से जुड़ी सलाह भी दी जा रही है। किसानों को फसल बीमा और आसानी से कर्ज जैसी वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
अनियमित बारिश से चावल और दालों पर खतरा
मानसून की यह अनियमितता खरीफ की फसलों, खासकर चावल और दालों के लिए बड़ा खतरा बन रही है। इसका सीधा असर यह हो सकता है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ जाएं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़े। मौसम विभाग का पूर्वानुमान आगे भी कम बारिश की ओर इशारा कर रहा है, जिसका एक मुख्य कारण संभावित एल नीनो का असर भी बताया जा रहा है। ऐसे में, मानसून पर निर्भर रहने वाले किसानों और लोगों के लिए यह समय वाकई बहुत मुश्किल भरा है।