जहाजों पर कितने भारतीय करते हैं काम, फिलहाल ओमान खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में कितने फंसे?
क्या है खबर?
युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी कर रखी है। ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका लगातार जहाजों को निशाना बना रहा है। हाल ही में एक जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले में 3 भारतीयों की मौत हो गई है। इस घटनाक्रम में जहाजों पर काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौती पेश की है। आइए जानते हैं जहाजों पर कितने भारतीय काम करते हैं।
संख्या
समुद्री क्षेत्र में काम करते हैं 3 लाख भारतीय
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल 3 लाख से ज्यादा भारतीय समुद्री क्षेत्र में कार्यरत हैं। एक दशक पहले ये संख्या केवल 1.25 लाख थी। जहाजों पर काम करने वाले कुल लोगों में भारतीयों की हिस्सेदारी 10 से 12 प्रतिशत के बीच है। ये लोग भारतीय और विदेशी दोनों कंपनियों द्वारा संचालित जहाजों पर काम करते हैं। यही वजह है कि किसी भी संकट के दौरान भारतीय नाविक जोखिम में पड़ जाते हैं।
काम
किस तरह के काम करते हैं भारतीय?
जहाजों पर भारतीय कप्तान, नौवहन अधिकारी, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञों जैसे विशिष्ट पदों पर काम करते हैं। ये टैंकर से लेकर वाणिज्यिक जहाजों पर काम करते हैं, जो कच्चे तेल और गैस से लेकर अनाज और उपभोक्ता वस्तुओं के दुनिया भर में परिवहन में मदद करते हैं। इस क्षेत्र में भारतीयों की भूमिका इसलिए भी अहम है, क्योंकि मात्रा के हिसाब से वैश्विक व्यापार का लगभग 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के जरिए होता है।
नुकसान
ईरान युद्ध में कितने भारतीय हुए हताहत?
ईरान युद्ध के दौरान जिन जहाजों पर हमला हुआ, उनमें कम से कम 78 भारतीय नाविक सवार थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 70 बाल-बाल बच गए, 4 घायल हुए, 3 मारे गए और एक लापता बताया गया। जहाजरानी महानिदेशालय ने चेतावनी दी थी कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य कार्रवाई से मिसाइल और ड्रोन गतिविधि, इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और अन्य समुद्री सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा हो सकते हैं। ये आंकड़े मार्च तक के हैं।
भारतीय
फिलहाल कितने भारतीय फंसे हुए हैं?
समाचार एजेंसी PTI ने मार्च में बताया था कि फारस और ओमान की खाड़ी में कम से कम 37 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे थे, जिनमें 1,100 से अधिक नाविक सवार थे। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने अब तक 3,474 नाविकों को स्वदेश भेजा है। अप्रैल में यह आंकड़ा 2,929 था और मार्च में 253 था। वहीं, DG शिपिंग कम्युनिकेशन सेंटर को नाविकों और उनके परिवारों से 11,600 फोन और 25,800 ईमेल मिले हैं।