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#NewsBytesExplainer: बांग्लादेश के साथ तनाव कम करने को लेकर क्या हैं भारत की योजनाएं?
बांग्लादेश चुनावों के बाद क्या है भारत की आगे की योजना

#NewsBytesExplainer: बांग्लादेश के साथ तनाव कम करने को लेकर क्या हैं भारत की योजनाएं?

लेखन आबिद खान
Feb 14, 2026
06:05 pm

क्या है खबर?

सालों की उथल-पुथल के बाद आखिरकार भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में चुनाव संपन्न हो गए हैं। नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को जीत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के अगले संभावित प्रधानमंत्री तारिक रहमान से फोन पर बात की है और जीत की बधाई दी। ये दोनों देशों के बीच बीते कुछ समय से तनावपूर्ण चल रहे संबंधों को पटरी पर लाने का मौका माना जा रहा है। आइए समझते हैं भारत की क्या योजना है।

चुनाव

चुनावी नतीजों को किस तरह देख रहा है भारत?

NDTV ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा कि चुनावी नतीजे भारत के लंबे समय से चले आ रहे इस विश्वास को और पक्का करते हैं कि सिर्फ लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार ही रिश्तों में स्थिरता ला सकती है। सूत्रों ने कहा कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में रिश्ते तेजी से खराब हुए, क्योंकि इस दौरान अराजकता को बढ़ावा देना, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बहाल करने में देरी और आपसी मामलों में भारत पर आरोप लगाना शामिल था।

सूत्र

बेहतर संबंधों के लिए चुनी हुई सरकार जरूरी- भारत

सरकारी सूत्रों ने NDTV से कहा, "भारत हमेशा उस चुनी हुई सरकार के साथ जुड़ा है, जिसे लोकप्रिय जनादेश मिला हो। ये भारत का लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान को दर्शाता है।" एक अन्य अधिकारी ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि लोकप्रिय जनादेश वाली और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार भारत-बांग्लादेश रिश्तों की स्थिरता और तरक्की के लिए बहुत जरूरी है। यह फैसला उदार मूल्यों की पवित्रता और 1971 की भावना के सम्मान का समर्थन करता है।"

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चिंताएं

यूनुस के शासन में क्या थीं भारत की चिंताएं?

यूनुस के कार्यकाल में सबसे बड़ी चिंता अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और इस पर कोई कार्रवाई न होना था। अधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में बार-बार उठाई गई चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे भरोसा और कम हुआ। भारत का मानना है कि यूनुस ने इस्लामी चरमपंथी संगठनों और पाकिस्तान समर्थक गुटों को राजनीति में ज्यादा जगह दी। भारत इसे द्विपक्षीय संबंधों के साथ बांग्लादेश की अंदरूनी स्थिति के लिए भी नुकसानदायक मानता है।

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रिश्ते

क्या ये रिश्तों में सुधार का मौका है?

भारत बांग्लादेश में चुने हुए नेतृत्व को तनाव को कम करने के लिए सही मौका मानता है। अब जिम्मेदारी तारिक पर है, जिन्हें लेकर भारतीय अधिकारी सावधानीपूर्वक कुछ उम्मीद रखे हुए हैं। BNP सरकारों के साथ पिछले मतभेदों को मानते हुए, भारत का मानना ​​है कि तारिक आर्थिक हालात और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए ज्यादा कूटनीतिक और राजनीतिक तरीका अपना सकते हैं। भारत के लिए BNP की जीत व्यक्ति से ज्यादा प्रक्रिया को लेकर है।

बयान

BNP बोली- भारत से जुड़ने के लिए तत्पर

BNP ने चुनावों में जीत के बाद पार्टी अध्यक्ष तारिक को बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया है। पार्टी ने कहा, 'हम आपसी सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता द्वारा निर्देशित बहुआयामी संबंधों को बढ़ाने के लिए भारत के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने के लिए तत्पर हैं।' BNP प्रधानमंत्री मोदी को तारिक के शपथ ग्रहण समारोह में भी आमंत्रित कर सकती है।

चुनौतियां

कम नहीं हैं चुनौतियां

सबसे बड़ा मुद्दा शेख हसीना की भारत में शरण का है। BNP नेता उन्हें सौंपने की मांग कर चुके हैं। ये तारिक के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी परेशानी का सबब है। जमात-ए-इस्लामी भले चुनाव हार गई हो, लेकिन संसद में उसकी अहम उपस्थिति रहेगी। ये भारत के साथ संवेदनशील मुद्दों पर तारिक पर दबाव और बयानबाजी को प्रेरित कर सकता है। इसके अलावा चीन और पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी और सीमा सुरक्षा जैसे कई मुद्दे भी हैं।

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