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ओमान के साथ आर्थिक समझौते से कैसे मजबूत होगी खाड़ी देशों तक भारत की पहुंच?
भारत-ओमान के बीच CEPA आज से लागू हो गया है (फाइल तस्वीर)

ओमान के साथ आर्थिक समझौते से कैसे मजबूत होगी खाड़ी देशों तक भारत की पहुंच?

लेखन आबिद खान
Jun 01, 2026
04:04 pm

क्या है खबर?

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) आज यानी 1 जून से लागू हो गया है। इस समझौते पर पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते से भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को ओमान के बाजार में ज्‍यादा अवसर मिलेंगे। साथ ही भारत के लिए खाड़ी देशों तक पहुंच का एक नया विकल्प तैयार होगा। आइए जानते हैं भारत को कैसे होर्मुज का विकल्प मिल गया है।

होर्मुज

ईरान युद्ध के चलते बंद हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य

दरअसल, ईरान युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह संकरा जलमार्ग वैश्विक स्तर पर रोजाना की कुल तेल खपत का लगभग 5वां हिस्सा और वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का 25 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। भारत भी अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है, इस वजह से भारत पर भी इसका असर पड़ा है।

विकल्प

भारत को कैसे मिलेगा होर्मुज का विकल्प?

इस समझौते का महत्व ओमान की भौगोलिक स्थिति को लेकर सबसे ज्यादा है। ज्यादातर खाड़ी देश तेल-गैस समेत सभी चीजों के समुद्री परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं, लेकिन ओमान की स्थिति अलग है। ओमान की ज्यादातर तटरेखा होर्मुज से बाहर सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी पर स्थित है। यही वजह है कि ओमान से सामान के आयात-निर्यात के लिए जहाजों को होर्मुज से नहीं गुजरना होता है।

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बयान

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, "ओमान की रणनीतिक स्थिति के कारण सलालाह और दुक्म जैसे प्रमुख बंदरगाह जलडमरूमध्य से यातायात बाधित होने पर भी सुलभ बने रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप, खाड़ी में संघर्ष या अस्थिरता के दौर में ओमान एक विश्वसनीय व्यापार और ऊर्जा प्रवेश द्वार के रूप में काम करना जारी रख सकता है। खाड़ी में चल रहे संघर्ष ने इस लाभ को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है।"

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व्यापार

युद्ध के दौरान बढ़ा ओमान-भारत के बीच व्यापार

ईरान युद्ध के चलते प्रमुख खाड़ी देशों के साथ भारत का व्यापार कम हुआ है। अप्रैल 2025 में भारत ने इन देशों के साथ लगभग 1.42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार किया था, जो अप्रैल 2026 में घटकर 9,300 करोड़ रुपये रह गया। लेकिन ओमान के साथ व्यापार बढ़ा है। कच्चे तेल और यूरिया की खरीदी बढ़ने के कारण ओमान से भारत का आयात 246.4 प्रतिशत बढ़कर 4,083 करोड़ रुपये से लगभग 1.42 लाख करोड़ रुपये हो गया।

फायदा

भारत को होंगे ये भी फायदे

CEPA के तहत, ओमान अपने 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर टैरिफ शून्य कर रहा है। CEPA से पहले यह छूट निर्यात के 15.3 प्रतिशत सामानों पर थी। इससे भारती रत्न और आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल सहित सभी प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों को फायदा होगा। अनुमानों के मुताबिक, समझौते से ओमान को 27,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के वस्त्र, रसायन और अन्य निर्यात शुल्क मुक्त हो सकते हैं।

व्यापार

कैसे हैं भारत-ओमान के बीच व्यापारिक संबंध?

भारत और ओमान के बीच वित्त वर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 80,000 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 95,000 करोड़ रुपये हो गया। ओमान में भारत-ओमान के 6,000 से अधिक संयुक्त उद्यम कार्यरत हैं। भारत से ओमान में कुल प्रत्यक्ष निवेश 6,000 करोड़ रुपये है। वहीं, अप्रैल 2000 से मार्च 2025 के बीच ओमान से भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 5,500 करोड़ रुपये है।

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