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ईरान से 7 साल बाद खरीदी, आयात में विविधता; भारत कैसे मजूबत कर रहा ऊर्जा सुरक्षा?
ईरान युद्ध के बीच भारत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है

ईरान से 7 साल बाद खरीदी, आयात में विविधता; भारत कैसे मजूबत कर रहा ऊर्जा सुरक्षा?

लेखन आबिद खान
Apr 09, 2026
03:27 pm

क्या है खबर?

अमेरिका और ईरान के बीच भले ही 2 हफ्ते का युद्धविराम लागू हो गया हो, लेकिन अभी भी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। इस माहौल से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं हैं और आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है। इससे निपटने के लिए बीते कुछ दिनों में भारत ने कई अहम कदम उठाए हैं, ताकि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आइए भारत द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानते हैं।

ईरान

2019 के बाद पहली बार ईरान से कच्चे तेल की खरीदी

भारत ने हालात को देखते हुए ईरान से कच्चे तेल का आयात फिर शुरू किया है। 2019 के बाद ये पहली बार है, जब ईरान से भारत ने तेल खरीदा है। अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से भारत ने 7 सालों से ईरान से तेल की खरीद बंद कर रखी थी। अब अमेरिका ने प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी है, जिसके बाद ईरान से तेल के जहाज भारतीय रिफाइनरियों में पहुंचने लगे हैं।

विविधता

तेल आयात के स्त्रोंतों में विविधता

भारत कच्चे तेल के लिए किसी भी एक क्षेत्र पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रह रहा है और कई क्षेत्रों से आयात बढ़ा रहा है। रूस भारत को कच्चे तेल का एक प्रमुख दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, वहीं पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों से भी तेल की खरीदी की गई है। द इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया कि यह रणनीति होर्मुज जलडमरूमध्य में अचानक व्यवधान या भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशीलता को कम करती है।

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सुरक्षा

तेल टैंकरों को सुरक्षा प्रदान कर रही नौसेना

युद्ध के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के कुछ जहाज सुरक्षित तरीके से निकले हैं। इनकी सुरक्षा के लिए भारत कई कदम उठा रहा है। इनमें संवेदनशील क्षेत्रों से कच्चा तेल लाने वाले जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा प्रदान करना और रिफाइनरियों तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रसद और बंदरगाह संचालन को अनुकूलित करना शामिल है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि तेल की भौतिक आपूर्ति भारत के रणनीतिक भंडारण प्रयासों के अनुरूप हो।

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रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

सरकार बढ़ा रही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

देश आपात स्थितियों में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भूमिगत भंडारण सुविधाओं में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार रखता है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, रिफाइनरी स्टॉक सहित मौजूदा भंडार फिलहाल 8 हफ्ते तक जरूरतों को पूरा कर सकता है। एक संसदीय समिति ने इसे बढ़ाकर 90 दिन करने की सिफारिश की है। युद्धविराम के दौरान, भारत इस भंडार को तेजी से भर रहा है, ताकि संघर्ष फिर से शुरू होने की स्थिति में हमारे पास बड़ा विकल्प हो।

अन्य कदम

ये कदम भी उठा रही सरकार

भारत युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति को लेकर भी तैयारी कर रहा है। इसके लिए घरेलू आपूर्ति और परिष्कृत ईंधनों के निर्यात में कटौती पर विचार किया जा रहा है। वहीं, युद्धविराम के कारण वैश्विक तेल कीमतों में 10-15 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे भारत को अनुकूल दरों पर कच्चा तेल खरीदने का मौका मिला है, ताकि भविष्य में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।

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