प्रदर्शन में शामिल होने पर छात्र को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट बोला- मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई?
क्या है खबर?
जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने एक छात्र को नोटिस जारी कर दिया था। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकता है, जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ सभी FIR रद्द कर दी थीं और भविष्य में किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट
CJI बोले- हमारे आदेश के बावजूद कैसे जारी हुआ नोटिस
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सख्त लहजे में कहा, "हमें इस बात पर हैरानी है कि हमारे साफ आदेश दिए जाने के बाद भी कि किसी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, एक मजिस्ट्रेट की नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई? हमारे 1 सितंबर के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले हमारे युवाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।"
मामला
क्या है मामला?
दरअसल, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
इसके बाद 4 सितंबर को उन्हें नोटिस भेजा गया था। इसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने सरकार के खिलाफ छात्रों को भड़काया और शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश की।
अक्षत से 5 लाख रुपये का मुचलका भी मांगा गया था।
हालांक, विवाद बढ़ने पर नोटिस वापस ले लिया गया था।
छात्र
छात्र ने कहा था- शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल हुआ
नोटिस मिलने के बाद छात्र अक्षत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि वो शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में शामिल हुआ था।
अक्षत ने ये भी कहा था कि इस दौरान वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में नहीं था, क्योंकि संस्थान करीब 3 महीने से बंद था।
अक्षत ने कहा कि वह 3 महीने के सेमेस्टर अवकाश के लिए 25 मई को JBU परिसर से चले गए थे और इस दौरान प्रयागराज में थे।
FIR
कोर्ट ने FIR रद्द करने के दिए थे निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए CJP के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर दिया था।
कोर्ट ने आदेश दिया था कि विरोध प्रदर्शनों के संबंध में 20 से 25 जुलाई के बीच विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज FIR पर आगे कोई कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी और उन्हें सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा।