सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की, CJP ने विरोध-मार्च वापस लिया
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली समेत 5 राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज FIR को रद्द कर दिया, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब 5 सितंबर को दिल्ली मार्च नहीं करेगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा मामलों को रद्द करने की मांग वाले आवेदन पर यह फैसला सुनाया। आपराधिक मामलों को रद्द करने के लिए संविधान के अनुच्छेद-142 का प्रयोग किया गया।
सुनवाई
कोर्ट ने कहा- 5 राज्यों के साथ ही अन्य राज्य भी नहीं करेंगे ऐसी कोई कार्रवाई
कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों द्वारा जुलाई में हुए विरोध-प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए दायर आवेदनों पर सुनवाई की।
इस दौरान कोर्ट ने कहा कि इन 5 राज्यों के साथ ही अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इसी तरह की FIR पर कोई कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी।
यह कार्रवाई पूरी तरह बंद मानी जाएगी।
सुनवाई
प्रदर्शनकारी छात्रों के भविष्य का रखा ध्यान
कोर्ट ने कहा, "कुछ मांगों के समर्थन में अपनी आवाज उठाने के लिए शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में भाग लेने आए युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए, हम पक्षों के बीच पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करना उचित समझते हैं।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध-प्रदर्शनों के संबंध में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
फैसला
आत्महत्या करने वाले पीड़ितों के परिवारों को 3 महीने में मुआवजा दे सरकार
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि NEET 2026 के संबंध में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 3 महीने के भीतर मुआवजा दिया जाए।
CJP ने केंद्र सरकार से छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की थी। हालांकि, इसे सरकार ने धनराशि की बाध्यता न बताते हुए स्वीकार कर लिया था।
प्रदर्शन में शामिल हत्या-रेप जैसे 2,873 अपराधियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर कोई राहत नहीं दी गई है।
कार्रवाई
अखिल भारतीय स्तर पर मुआवजे के भुगतान संबंधी नीति तैयार होगी
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें 20 से 25 जुलाई के बीच विरोध-प्रदर्शन के संबंध में दर्ज FIR पर अब आगे कोई कार्रवाई नहीं करेगी।
मुआवजे को लेकर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अखिल भारतीय स्तर पर मुआवजे के भुगतान संबंधी एक नीति तैयार करेगी, जिसमें 3 महीने का समय लग सकता है।
नीति सभी संबंधित राज्य सरकारों को भेजी जाएगी, ताकि मुआवजे के भुगतान के लिए एक नियमित तंत्र अपनाया जा सके।
प्रदर्शन
CJP ने कोर्ट को बताया- अब 5 सितंबर को नहीं करेंगे विरोध मार्च
मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार के आश्वासन पूरा न करने की संभावना को देखते हुए CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली मार्च का आह्वान किया था।
इस पर CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने कोर्ट के समक्ष बयान पढ़ा जिसमें मार्च आह्वान वापस लेने की बात कही गई।
दास ने कहा, "भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासनों, न्यायिक गरिमा और कोर्ट द्वारा पारित आदेश को ध्यान में रखते हुए CJP 5 सितंबर को विरोध-मार्च आह्वान वापस लेता है।"