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#NewsBytesExplainer: क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया कैसी होती है

#NewsBytesExplainer: क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है?

लेखन आबिद खान
Sep 23, 2026
06:08 pm

क्या है खबर?

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर हैं। कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने ज्ञानेश के इस्तीफे की मांग की है। आम आदमी पार्टी ने तो यहां तक कह दिया कि ज्ञानेश को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा होना चाहिए। आइए जानते हैं CEC को पद से कैसे हटाया जा सकता है।

रिपोर्ट

सबसे पहले जानिए रिपोर्ट में क्या दावा किया गया

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश के समक्ष दर्ज कराई थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने जिन मुद्दों पर आपत्ति जताई उनमें नए मतदाताओं का पंजीयन, मतदाता सूची से नाम हटाना और जोड़ना और SIR प्रक्रिया में मतदाता का नाम वापस जोड़ने के आदेशों के खिलाफ अपील करना जैसै मुद्दे शामिल थे।

चुनाव आयोग

अब चुनाव आयोग के बारे में जानिए

चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। इसे संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अधिकार मिले हैं, जो चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार आयोग को सौंपता है।

आमतौर पर चुनाव आयोग में एक CEC और 2 चुनाव आयुक्त (EC) होते हैं।

स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संविधान में CEC के कार्यकाल और उसे हटाने को लेकर मजबूत प्रावधान किए गए हैं।

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तरीका

CEC को कैसे हटाया जा सकता है?

CEC को हटाने के बारे में संविधान के अनुच्छेद 324(5) में जिक्र है।

CEC को ठीक उसी तरीके से हटाया जा सकता है, जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। यानी CEC को केवल महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता है।

CEC को हटाने के आधार भी जज की तरह ही हैं। उन्हें 'सिद्ध कदाचार या अक्षमता' के आधार पर ही हटाया जा सकता है।

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महाभियोग

कैसे शुरू होती है महाभियोग की प्रक्रिया?

CEC को पद से हटाने के लिए लोकसभा या राज्यसभा में प्रस्ताव लाया जाता है। इसके लिए लोकसभा के 100 या राज्यसभा के कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी है।

इसके बाद प्रस्ताव को लोकसभा या राज्यसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। वे प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।

अगर प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो निष्कासन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होती है। फिर 3 सदस्यीय समिति का गठन किया जाता है।

प्रस्ताव

प्रस्ताव का दो-तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी

अगर जांच समिति आरोपों को सही पाती है तो संसद में महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान होता है।

इस प्रस्ताव का सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी है।

इसके बाद प्रस्ताव दूसरे सदन में जाएगा और वहां भी दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना जरूरी है। दोनों सदनों से महाभियोग प्रस्ताव पास होने के बाद राष्ट्रपति CEC को हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं।

नोटिस

इसी साल CEC को हटाने की हुई थी कोशिश

इसी साल अप्रैल में CEC ज्ञानेश को हटाने के लिए विपक्षी पार्टियों ने नोटिस दिया था। हालांकि, इसे लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया था।

तब विपक्षी पार्टियों ने ज्ञानेश पर 7 आरोप लगाए थे। इनमें पद पर रहते हुए पक्षपाती और भेदभावपूर्ण व्यवहार, साबित दुर्व्यवहार, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना और बड़ी संख्या में लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना जैसे आरोप शामिल थे।

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