जीवन शैली से आगे बढ़ेगा हिंदू धर्म? सुप्रीम कोर्ट में गीता से नई परिभाषा की गुहार
एक हिंदू संगठन ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि हिंदू धर्म की पुरानी परिभाषा को बदला जाए, जिसमें इसे सिर्फ 'जीवन जीने का तरीका' बताया गया है। संगठन का तर्क है कि यह परिभाषा हिंदू धर्म की वास्तविक गहराई और उसकी विविधताओं को सही ढंग से नहीं बताती।
इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया है कि भगवद गीता को एक मार्गदर्शक के रूप में इस्तेमाल किया जाए, ताकि इसकी एक ज्यादा बेहतर और सार्थक परिभाषा तैयार की जा सके। यह गुजारिश मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 9 न्यायाधीशों की पीठ के सामने की गई है।
सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का विवाद
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश को लेकर बहस जारी है। संगठन का मानना है कि हिंदू धर्म को 'जीवन जीने का तरीका' कहना उसकी वास्तविक पहचान और उसके कई विश्वासों व रीति-रिवाजों को अनदेखा करना है।
अदालतों ने पिछले कई सालों से धर्मों को परिभाषित करने में जिस कठिनाई का सामना किया है, उससे जाहिर होता है कि ऐसे सवाल कितने जटिल हो सकते हैं।