हिमाचल पर GLOF का मंडराता साया, केंद्र से मांगे 105 करोड़ रुपये
हिमाचल प्रदेश केंद्र सरकार से खतरनाक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) से निपटने के लिए 105 करोड़ रुपये की मांग कर रहा है। इस योजना के तहत गहेपान, वासुकी, काशा घाड और सांगला जैसी मुख्य झीलों पर शुरुआती चेतावनी प्रणाली और सुरक्षा उपाय लगाए जाएंगे।
ये ऐसी झीलें हैं जहां बाढ़ आने का खतरा सबसे ज्यादा है, इसलिए इन पर खास ध्यान दिया जा रहा है। 52 करोड़ रुपये शुरुआती चेतावनी देने वाली तकनीक लगाने पर खर्च होंगे, वहीं बाकी रकम निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बचाने के इंतजामों पर लगाई जाएगी।
CWC 681 हिमालयी झीलों का अध्ययन करेगा
राज्य की प्रोजेक्ट रिपोर्ट वित्तीय मदद के लिए भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी जाएगी। इस बीच, केंद्रीय जल आयोग 681 हिमालयी ग्लेशियल झीलों का अध्ययन करके खतरों का नक्शा तैयार करेगा।
हिमाचल ने ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा बेहतर तालमेल की भी मांग की है। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि राज्य में कुल 76 झीलों की पहचान हुई है, जिनमें से 59 झीलें दस हेक्टेयर से बड़े क्षेत्र में तिब्बती हिमालयी क्षेत्र में आती हैं। एक खास GLOF वर्कशॉप तकनीकी तालमेल को और बढ़ाएगी, जिससे हिमालयी राज्यों में आपदा से निपटने की तैयारी मजबूत होगी।