हरियाणा में लंबी बिजली कटौती; हजारों शिकायत दर्ज, अंधेरे में क्यों डूबा राज्य?
क्या है खबर?
दिल्ली से सटे हरियाणा के कई इलाके अंधेरे में डूब गए हैं। गुरूग्राम, फरीदाबाद और नूंह समेत कई जिलों में बुधवार और गुरुवार को कई घंटों तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। बुधवार रात को 10 बजे से कई जिले अंधेरे में हैं, जिससे घरों और उद्योगों के कामकाज पर असर पड़ा। गुरुवार को करीब 12 घंटे के अंदर बिजली विभाग को कटौती की 3,000 से अधिक शिकायतें मिलीं। हरियाणा में इतनी भीषण कटौती क्यों हुई? आइए, जानते हैं।
प्रदर्शन
कटौती के खिलाफ लोगों का गुस्सा
फरीदाबाद के सेंक्टर 16 और 31 में गुरुवार सुबह से बिजली नहीं थी, जिसकी वजह से लोगों का गुस्सा सड़क पर दिखा। NIT-2 इलाके में भी रात भर बिजली गुल रहने से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए।
गुरूग्राम में घरेलू उपकरण ठप हो गए और पानी की आपूर्ति बाधित हो गई। घर से काम करने वालों को इंटरनेट न होने से परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिजली कटौती इतनी लंबी थी कि इंवर्टर का बैकअप भी खत्म हो गया।
इलाके
इन इलाकों में आपूर्ति रही बाधित
बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में पड़ा है, जहां दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) सेवा देता है।
नूंह जिले में पुन्हाना, नगीना और फिरोजपुर झिरका समेत कई इलाकों में कटौती रही। फरीदाबाद में, NIT-2 इलाके में सड़कों पर उतरे लोगों को पुलिस ने शांत कराया।
गुरुग्राम में आवासीय इमारतों के अलावा दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर-37 में इंडस्ट्रियल जगहों पर कामकाज प्रभावित हुआ।
गुरुग्राम के सेक्टर-37 में बुधवार रात 10 बजे से बिजली नहीं है।
कटौती
हरियाणा में क्यों हुई इतनी लंबी बिजली कटौती?
दरअसल, हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) ने 18 अक्टूबर को फैसला किया है कि गुरूग्राम और नूंह को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड पैरलल 25 साल बिजली वितरण करेगी।
लाइसेंस से प्राइवेट कंपनी को उन इलाकों में प्रवेश की इजाजत मिलेगी, जहां अभी सरकारी कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) सेवा देती है।
इसी को लेकर हरियाणा बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स संयुक्त मोर्चा ने दूसरे संगठन के साथ मिलकर 3 दिवसीय हड़ताल की घोषणा की और इसे निजीकरण बताया है।
विरोध
24 अक्टूबर तक रहेगी हड़ताल
यह झगड़ा अब कर्मचारी यूनियनों, राज्य सरकार और पावर रेगुलेटर के बीच टकराव में बदल गया है, जिसका सीधा असर बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
पहले के विरोध और बातचीत से बात न बनने पर कर्मचारियों ने 22 से 24 अक्टूबर तक 3 दिन की राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी, जो 21 अक्टूबर को रात 10 बजे शुरू हुई है।
यूनियनों ने चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
विवाद
विवाद क्या है?
कर्मचारियों का कहना है कि सरकारें जिस तरह का पारंपरिक निजीकरण करती हैं, उस मॉडल में, सरकार किसी सार्वजनिक सुविधा का मालिकाना हक या ऑपरेशनल नियंत्रण किसी निजी कंपनी को ट्रांसफर कर सकती है।
लेकिन पैरेलल वितरण लाइसेंस, किसी दूसरे वितरक को उस क्षेत्र में काम करने की इजाजत देता है, जहां पहले से ही कोई मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी सर्विस दे रही है।
मौजूदा मामले में, इलेवन पावर को DHBVN के क्षेत्र में बिजली वितरण बाजार में प्रवेश मिलेगा।
मांग
कर्मचारियों का क्या कहना है?
बिजली कर्मचारियों के साथ कई संगठन भी खड़े हो गए हैं। संगठनों का कहना है कि गुरूग्राम और नूह जैसे वाणिज्यिक जरूरी इलाकों में निजी ऑपरेटर आने देने से सार्वजनिक सुविधा प्रभावित हो सकती है।
डर है कि इससे निजी कंपनी को अपने मौजूदा सर्विस एरिया में मुकाबला करने का मौका मिल सकता है। संगठनों ने कर्मचारियों की नौकरी, किसानों और आम उपभोक्ताओं को लेकर चिंता जताई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले में बैठक की है।
ट्विटर पोस्ट
बिजली कटौती को लेकर हंगामा
हरियाणा में 24 घंटे से बिजली संकट है, जनता सड़कों पर उतर रही है और बिजली कर्मचारी निजीकरण के विरोध में हड़ताल पर हैं। बीजेपी सरकार के 12 साल में नए बिजली प्लांट लगाना तो दूर, सरकार मौजूदा बिजली व्यवस्था भी नहीं संभाल पा रही। अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए गुरुग्राम और नूंह में… pic.twitter.com/dgOQjTMS7j
— Team Deepender INC (@TeamDeepender) October 23, 2026