हंतावायरस से प्रभावित जहाज पर 2 भारतीय चालक भी सवार, स्थिति की जानकारी नहीं- रिपोर्ट
क्या है खबर?
अटलांटिक महासागर में काबो-वर्डे के पास जिस डच-झंडे वाले MV होंडियस जहाज पर हंतावायरस फैला है, उसमें 2 भारतीय भी शामिल हैं। वे चालक दल का हिस्सा हैं। इंडिया टुडे ने बताया कि उसने MV होंडियस का संचालन करने वाली डच ध्रुवीय यात्रा कंपनी ओशनवाइड एक्सपेडिशन्स से संपर्क करके जहाज पर सवार लोगों की जानकारी मांगी थी। कंपनी ने 4 मई को अपने जवाब में प्रत्येक यात्री और चालक दल के सदस्य की राष्ट्रीयता के अनुसार विस्तृत जानकारी दी है।
जहाज
जहाज पर 23 देशों के 149 यात्री सवार
रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज पर 23 अलग-अलग देशों के 149 लोग शामिल थे। इनमें से अधिकांश यात्री और पर्यटक थे, जो ग्रेट ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी और स्पेन से आए थे। जहाज पर चालक दल के सदस्यों में फिलीपींस, यूक्रेन, नीदरलैंड और पोलैंड के नाविकों और सहायक कर्मचारियों के साथ भारत के सदस्य भी शामिल हैं। इनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन कंपनी ने भारतीयों की जहाज पर भूमिका, स्वास्थ्य स्थिति और संक्रमण के प्रभाव की जानकारी नहीं दी।
यात्रा
जहाज पर कैसे फैला हंतावायरस?
जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटीना से काबो-वर्डे रवाना हुआ था। यात्रियों ने अर्जेंटीना-चिली-उरुग्वे की यात्रा की और पक्षी देखने गए। इस दौरान जहाज में सवार डच दंपति वायरस ले जाने वाली चूहे की प्रजाति के संपर्क में आए। वे जहाज में लौटने तक ठीक थे। तभी 6 अप्रैल को पुरुष में लक्षण आए और 11 अप्रैल को जहाज पर मृत्यु हो गई। उनकी पत्नी शव के साथ सेंट-हेलेना द्वीप पर उतरी। उनकी 25 अप्रैल को जोहान्सबर्ग में मौत हो गई।
मामला
अब तक 5 मरीज आए सामने
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि जहाज पर तीसरी मौत एक महिला की 2 मई को हुई। उनमें लक्षण 28 अप्रैल को आए थे। अभी तक 8 संदिग्ध लोग सामने आए हैं, जिनमें 3 मौतें हुई हैं। इनमें से 5 पुष्ट मामले हैं। जहाज पर संक्रमित लोगों को आइसोलेशन में रखा गया है और अब वह कैनरी द्वीप समूह रवाना है। जहाज को विसंक्रमित किया गया है और सभी दूरी बनाए हुए हैं।
सतर्क
WHO ने कहा- कोरोना जैसी स्थिति नहीं
अभी तक 3 गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस से निकाला जा चुका है, शेष यात्री 11 मई को जहाज से उतरेंगे। सेंट-हेलेना द्वीप पर उतरने वाले 12 देशों के 40 यात्रियों की जानकारी उनके देशों को दी गई है। इनकी तलाश जारी है। WHO का कहना है कि यह वायरस कोरोना जैसी स्थिति पैदा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यह मनुष्यों के बहुत और अधिक समय तक नजदीक होने से ज्यादा फैलता है। इसमें 45 दिन का आइसोलेशन जरूरी है।