गुवाहाटी हाई कोर्ट ने अमीनुल को घोषित किया विदेशी, 15 दस्तावेजों को किया खारिज
असम के एक दिहाड़ी मजदूर अमीनुल हक को गुवाहाटी हाई कोर्ट ने विदेशी घोषित कर दिया है। उन्होंने अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 15 दस्तावेज पेश किए थे, फिर भी अदालत ने उन्हें विदेशी माना। कोर्ट ने कहा कि अमीनुल हक विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत नागरिकता के लिए तय कानूनी शर्तों को पूरा नहीं कर पाए। उन्होंने जो दस्तावेज दिए, उनमें 1951 NRC की कॉपी, मतदाता सूची, एक जमीन के दस्तावेज और अपने पिता की गवाही भी शामिल थी, लेकिन इनमें से कोई भी दस्तावेज अदालत को यह भरोसा नहीं दिला पाया कि अमीनुल 24 मार्च, 1971 से पहले भारत के नागरिक थे, जो असम में नागरिकता के लिए तय कट-ऑफ तारीख है।
कोर्ट ने कागजातों में गड़बड़ और पहचान पत्र नाकाफी बताए
अदालत ने अमीनुल के दस्तावेजों में कई खामियां बताईं। जैसे, मतदाता रिकॉर्ड में उनकी उम्र में अंतर था और अलग-अलग गांवों से उनके संबंध साफ नहीं दिख रहे थे। कुछ अहम दस्तावेज इसलिए भी खारिज कर दिए गए क्योंकि उनमें जरूरी प्रमाण पत्र नहीं था। मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड को भी पर्याप्त नहीं माना गया। अदालत ने साफ किया कि ये दस्तावेज सिर्फ़ पहचान के लिए होते हैं, इनसे नागरिकता साबित नहीं होती। इस फ़ैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि आखिर नागरिकता साबित करने के लिए कौन सा दस्तावेज मान्य होगा।